जैथरा में रामलीला में मंचन करते कलाकार ।संवाद
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जलेसर, एटा। रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाएं पर वचन न जाए। इसी चौपाई के साथ जब प्रभु राम माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ वन गमन को निकले तो रामलीला पंडाल में मौजूद लोगों की आखें सजल हो उठीं। इससे पूर्व राम और माता कौशल्या और भ्राता लक्ष्मण के संवाद की लीला का मंचन किया गया।
सैनिक पड़ाव स्थित रामलीला मंच पर देर रात करीब साढ़े आठ बजे लीला का मंचन आरंभ हुआ। शुक्रवार के लीला प्रसंग में सबसे पहले कैकई द्वारा वरदान में राम को वन और भरत को वनवास की जानकारी माता कौशल्या को हुई तो वह बेचेन हो उठीं। इस दौराना माता से राम के संवाद पर लोगों की आखें नम हो उठीं।
वहीं जलेसर में सार्वजनिक रामलीला रंगमंच पर स्थानीय कलाकारों के द्वारा सीता हरण, खर-दूषण वध की लीला का मंचन किया गया। लीला का शुभारंभ संजीव दीक्षित ने गणेश पूजन कर किया। इस दौरान कान्हा वार्ष्णेय, गौरव वार्ष्णेय, वीरेंद्र गुप्ता, जगदीश रावल, धर्मेंद्र बघेल, लालू बघेल आदि मौजूद रहे।