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श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल

Fri, 16 Oct 2015 05:52 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
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बाराहाद्वारी पर गुरुवार देर रात रामलीला मंच पर कलाकारों ने धनुष यज्ञ लीला, परशुराम लक्ष्मण संवाद, सीताजी स्वंयवर आदि लीलाओं का मंचन किया। देर शाम तक दर्शकों ने लीलाओं का आनंद लिया।
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महाराजा जनक की प्रतिज्ञा को सुन देश-विदेश से कई राजा जनक की सभा में पहुंचे। जहां भगवान शिव के धनुष को तोड़ने के लिए सभी राजाओं ने कोशिश की, लेकिन हिला भी नहीं सके। इससे हताश होकर महाराजा जनक ने कहा धरती पर वीर नहीं रहे। तभी सभा में बैठे विश्वामित्र इस लीला को देख मंद मंद मुस्करा रहे थे। उन्होंने श्रीराम के मुख की ओर निहार कर उन्हें धनुष तोड़ने की आज्ञा दी। गुरु को शीश नवा कर श्रीराम ने धनुष का झटके से उठा लिया और उसको तोड़ दिया। धनुष टूटते ही चारों ओर  प्रभु श्रीराम पर पुष्पवर्षा होने लगी। तभी क्रोधित परशुराम सभा में पहुंच गए। जहां लक्ष्मण और भगवान परशुराम के बीच भीषण वाक युद्ध हुआ।
प्रभु श्रीराम के क्षमा मांगने के बाद परशुराम का क्रोध शांत हुआ। धनुष टूटने के बाद जनक ने जगत माता का विवाह श्रीराम के साथ कर दिया। माता सीता स्वयंवर व अन्य लीलाओं का भक्त देर शाम तक आनंद लेते रहे। नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चे, बुजुर्ग, युवा रामलीला का मंचन देखने पहुंचे। मंचन के दौरान पुरोहित पंडित ओमप्रकाश पाठक ने राम, लक्ष्मण, विश्वामित्र स्वरूपों की आरती उतारी। कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष विनोद गुप्ता बॉबी, कोषाध्यक्ष राजकुमार वर्मा, महामंत्री राजीव वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे।
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राम बनवास से आज से होगा प्रभूपार्क में लीलाओं का मंचन
प्रभूश्रीराम के तिलक से पूर्व श्री राम के बनवास के साथ ही आज शनिवार से श्रीराम लीला का मंचन प्रभूपार्क में शुरू हो जाएगा। शनिवार को मंथरा कैकयी संवाद, कैकयी का कोप भवन में जाना, दशरथ कैकयी संवाद, राम वन गमन, श्री राम जी से सुंमत की विदा, राम-केवट संवाद, श्री राम का चित्रकुट विश्राम, दशरथ मरण, राम भरत मिलन आदि लीलाओं का मंचन होगा। कमेटी अध्यक्ष ने सभी भक्तों से बड़ी संख्या में लीलाओं का आनंद लेने की अपील की है।
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