राजा का रामपुर। नगरीय क्षेत्र के विकास के लिए अंग्रेज हुकूमत ने 1907 में रजवाड़े की व्यवस्था को समाप्त कर राजा का रामपुर नगर पंचायत बनाई थी। इसके बाद हुए चुनाव में मुबारिक सिंह पहले चेयरमैन बने, जो पांच बार तक लगातार इस कुर्सी पर काबिज रहे।
जानकार बताते हैं 1905 में बिल्सड़ के बाबा पूरणमल की हत्या वहां के राजा रामसहाय द्वारा करा दी गई। जिसके बाद ब्राह्मणों के विरोध पर रामसहाय राजा का रामपुर आकर बसे। तब यहां पर केवल कछपुरा नाम का एक गांव हुआ करता था। जो कि आज नगर पंचायत का एक मोहल्ला है। 1907 में नगर पंचायत गठन के बाद पहली बार चुनाव हुआ। जिसमें राजा का रामपुर के प्रथम चेयरमैन मुबारिक सिंह हुए। जिनका काफी लंबा कार्यकाल रहा। 1907 से लेकर 1933 तक लगातार पांच बार चेयरमैन बनते रहे। 1939 में उनकी मृत्यु होने पर यह सीट खाली हुई। जिसके बाद नगर पंचायत के सदस्य कालीचरण को 3 महीने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष चुना गया। संवाद
2017 तक बने 13 नगर पंचायत अध्यक्ष
1907 से 1939 - मुबारिक सिंह (पांच कार्यकाल)
1939 - कालीचरण (तीन माह)
1939-1944 - लाला रामभरोसे लाल
1944-1946 - सुपरसीट
1946-1951 - रामकुंवर गुप्ता
1951-1952 - सुपरसीट
1952-1957 - नाथूराम शाक्य
1957-1962 - डॉ. रूपनारायण
1962 - 1974 - डॉ. सतीश चंद्र सक्सेना
1974-1989 - सुपरसीट
1989-1994 - महावीर सिंह राठौर
1994 - 1997 - सुपरसीट
1997-2002 - रामेश्वर दयाल
2002-2007 - ब्रजमोहन सागर
2007-2012 - अमर सिंह
2012-2017 - गिरजा देवी
2017- 2022 - महावीर सिंह राठौर