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जिले में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

Sat, 14 May 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा
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जिले में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति - फोटो : अमर उजाला
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जिले में दो साल से लगातार सूखा पड़ने और भूगर्भ जल स्तर गिरने से हैंडपंप, तालाब, नलकूप सूखने के बाद भी जिला प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है। आलम यह है  प्रशासन ने जिले में गिने चुने स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग बनाकर खानापूर्ति कर ली, लेकिन नगर पालिका, जल निगम और ऑफीसर्स कालोनियाें के अलावा किसी विभाग ने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट नहीं लगाए हैं।
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भूगर्भ जलस्तर गिरने के कारण जिले में दो साल से पेयजल और सिंचाई के पानी की समस्या है। मगर, जिला प्रशासन को पेयजल संकट से उभरने का कोई इंतजाम नहीं। जबकि बारिश का करोड़ों लीटर पानी यूं ही नालियां में बह कर निकल रहा है। नगर पालिका परिसर में तीन मिनी रेन वॉटर हार्वेेस्टिंग प्लांट लगाए हैं। ऑफीसर्स कालोनियों में जहां तहां रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगे हैं। जहां पूरी बारिश के सीजन में मुश्किल से दोे लाख लीटर पानी एकत्रित होता है। जल निगम ने पहरई, चांदपुर, मिर्जापुर, खेरिया, समसपुर, विचपुरी, देवकरनपुर, राजमलपुर समेत 18 पानी की टंकिंयों में वाटर रिचार्जिंग सिस्टम लगाकर खानापूर्ति की है। जलनिगम पीएसी में हो रहे निर्माण में वॉटर रिचार्ज सिस्टम लगा रहा है। लेकिन निगम ने जिले में बनी 60 से अधिक अन्य पानी की टंकियाें में ओवर फ्लो होने पर वॉटर रिचार्ज की व्यवस्था नहीं की है। इसके चलते ओवरहैड से ओवर फ्लो और बारिश का पानी यूं ही नालियां से बहकर बेकार हो रहा है। जल निगम के एई कहते हैं कि नए निर्माण पर हर जगह वाटर रिचार्ज सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
इसलिए नहीं लगने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
जिला प्रशासन के अधिकारियों की माने तो रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तो हर निर्माण वाले स्थान पर लगाया जा सकता है और पहल भी की जाती है। लेकिन हर योजना में धन शासन से इतनी धीमी गति से आता है कि योजना पूरी करने में खर्च हो जाता है। अधिकारियों ने दबी जुबान से यह भी बताया कि निर्माण के प्रस्ताव में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को कभी शामिल नहीं किया जाता। इसके चलते भी जिले में कम सिस्टम लग पाते हैं।
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