राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि हमारे देश की संस्कृति समृद्ध और महान है। हमें इसकी अच्छाईयों को पहचानना चाहिए। उन्होंने कहा कि रामचरित मानस ने जो संदेश दिए हैं वह मानव जीवन से जुड़े संदेश हैं।
राज्यपाल सैलई के भक्ति महोत्सव में आयोजित सारस्वत सम्मान, पारायणम पत्रिका विमोचन के धार्मिक कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना एक आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है। इसे संकीर्णता से नहीं व्यापक दायरे से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम राज्य के अनुसार ही कोई सुदृढ़ शासन की व्यवस्था बन सकती है। संविधान ने यह अधिकार जनता को दिया है। जनता मालिक है। अच्छा चुनेगी तो अच्छा पाएगी बुरा चुनेगी बुरा पाएगी। उन्होंने संत तुलसीदास का जिक्र करते हुए कहा कि तुलसी ने राम की गाथा को घर-घर पहुंचा दिया। भारत ही नहीं अपितु थाईलेंड, इंडोनेशिया सहित अन्य देशों में रामलीला होती है। सुंदरकांड का पाठ होता है। मैं राम को नमन करता हूं। उन्होंने राम के प्रति हनुमान भक्ति पर भी कई उदाहरण पेश किए। उन्होंने कहा कि हनुमान के बिना राम अधूरे हैं। उन्होंने कन्या शिक्षा पर जोर दिया। वहीं भ्रूण हत्या को पाप बताया। उन्होंने कहा कि कन्या हमारे आंगन की मणि है। उन्होंने हर गंाव को नशा मुक्त, जुआ मुक्त, निरक्षरता मुक्त, गदंगी मुक्त, मुकद्मा मुक्त बनाने का सुझाव रखा। गांव-गांव में 10-10 युवाओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपने की बात कही। उन्होंने सैलई धाम के भक्ति समागम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
समारोह को हरियाणा सरकार के शिक्षा एवं पर्यटन मंत्री रामविलास शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग इतिहास बनाते हैं, इतिहास वहीं बना सकते हैं जो त्याग की भावना से चलते है, उदार होते है और समाज के बारे में सोचते है। उन्होंने भक्ति समागम के आयोजन की सराहना करते हुए न्यायमूर्ति पीएन पाराशर को बधाई दी। उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह को ऊर्जा का संचरण करने वाला बताते हुए कहा कि वह हमारी प्रेरणा है। कार्यक्रम को एटा के सांसद राजवीर सिंह, अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समाज में भक्ति समागम अच्छी राह और प्रेरणा देते है और यहां आने वाले लोग कुछ न कुछ ज्ञान लेकर ही जाते है। यूजीसी के पूर्व चेयरमैन राजशेखरन पिल्ले ने भगवान राम के चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं उतर प्रदेश संस्कृत संस्थान की अध्यक्ष साधना मिश्रा ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। न्यायमूर्ति पीएन पाराशर ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान पारायणम पत्रिका का विमोचन राज्यपाल व अन्य अतिथियों ने किया। संचालन जनपद के न्यायाधीश राजेंद्र बाबू शर्मा, डा. पुनीत शास्त्री, श्रीकृष्ण शरद ने किया।