एटा। भ्रष्टाचार पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पर जिले में बार-बार सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। यहां साल में तीन बार घूसखोर पकड़े गए हैं। चिंताजनक बात तो यह है कि तीनों ही मामलों में जायज कामों के लिए रिश्वत ली जा रही थी। अलीगढ़ भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) की टीम एक साल में तीन ऐसे घूसखोरों को पकड़ चुकी है। पहले रोजगार सेवक फिर विद्युत जेई और अब एसडीएम के पेशकार को पकड़ा गया है। इसे शनिवार को अदालत में पेश कर मेरठ जेल भेज दिया गया।
अलीगढ़ से आई भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने शुक्रवार को सदर तहसील में एसडीएम के पेशकार राजकुमार को 18 हजार की रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया था। मामले की रिपोर्ट थाना बागवाला में ट्रैप टीम प्रभारी अनिल कुमार यादव ने थाना पिलुआ में दर्ज कराई है। इसके मुताबिक अलीनगर निवासी भगवान दास ने एसीओ को शिकायत की थी। बताया था कि अपनी माता की मृत्यु के बाद उनकी वसीयत के अनुसार संपत्ति में नामांतरण के लिए नायब तहसीलदार मारहरा के न्यायालय में वाद दायर किया। यहां वसीयत को दरकिनार कर विपक्षीगण को बराबर का हकदार होने का निर्णय दे दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने एसडीएम न्यायालय में वाद दायर किया। यहां नायब तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर गुणदोष के आधार पर निर्णय देने के लिए मामले को वापस भेज दिया।
आरोप लगाया कि एसडीएम के पेशकार राजकुमार ने आदेश की प्रति देने के लिए 18 हजार रुपये की मांग की है। इसके बाद एसीओ ने मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी। 22 अगस्त को सुबह के समय ही टीम यहां पहुंच गई।
शिकायतकर्ता को बुलाकर 500-500 के 36 नोट प्राप्त कर उन पर पाउडर लगाया गया। इन नोटों को सदर तहसील में लेकर गया। पीछे-पीछे एसीओ की टीम भी पहुंच गई। शिकायतकर्ता को पेशकार ने एक फाइल कवर दिया। इसके अंदर उसने रुपये रखकर पेशकार को थमा दिए। इसके तुरंत बाद टीम ने पेशकार को रुपयों सहित पकड़ लिया। थाना प्रभारी एसीओ अलीगढ़ देवेंद्र सिंह ने बताया कि पेशकार को शनिवार को मेरठ में एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद मेरठ जेल में भेज दिया गया है।