अपनी आंखों के सामने बच्चों को खोने का दर्द लिए बैठे परिवार इंसाफ की गुहार लगा रहा था,तो वही पुलिस-प्रशासन के आलाधिकारी उन्हे इंसाफ न देकर उनपर लाठियां बरसाते रहे। बच्चों को खोने के बाद परिवारीजनों के आंशू रोके से रूके नही रूक रहे थे,ऊपर से पुलिस द्वारा परिवारीजनों पर बरसाई गई लाठियों ने जख्म को और गहरे कर दिए। सड़क से उठाकर पुलिस ने जबरदस्ती शव,परिवारीजनाें को गाड़ी में धकेल दिया। उनकी चीख-पुकार नजरअंदाज कर दी।
शहर के कचहरी रोड स्थित अंश पुत्र सुनील, संदीप पुत्र धर्मपाल की हुई मौत के बाद लोग शवों को लेकर जीटी रोड आ गए। आक्रोशित दोषी पुलिसकर्मियों तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने की मांग पर अड़ गए थे। मगर हंगामा बढ़ा और पुलिस को कई बार खदेड़ा गया। बाद में सीआरपी के आने के बाद पुलिस-सीआरपी ने उपद्रवियों को खदेड़ा। पब्लिक मौके से भाग गई, लेकिन परिवारीजन शव लेकर जीटी रोड पर ही बैठे रहे। बार-बार अधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहे परिवारीजनाें पर ही पुलिस ने लाठियां बरसा दी। उसके बाद भी परिवारीजनों ने शव को नहीं उठने दिया। बाद में आक्रोशित हुई पुलिस ने जबरदस्ती परिवारीजनों को धकेल कर गाड़ियों में बैठाया, बाद में शवों को अंदर रखवाकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
आर्थिक मदद दिलाएंगे पीड़ितों को
भाजपा संासद राजवीर सिंह घटना की जानकारी पर एटा पहुंचे। सांसद ने बताया कि पुलिस मृतक मासूम अंश के पिता पर छत से फायरिंग करने के आरोप में केस दर्ज करने की तैयारी कर रही थी। सांसद की माने तो वह अपने समर्थकों के साथ देहात कोतवाली पहुंचे और परिवार को रिहा कराया। राजवीर सिंह ने कहा कि कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एएसपी ने लापरवाह अग्निशमन विभाग के कर्मचारियोें के खिलाफ कार्रवाई की बात कही हैं। उन्होंने कहा कि सीएम ने मृतकों के परिवारीजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है, लेकिन वह सीएम से मिलकर परिवार को और मदद कराने का प्रयास करेंगे। भाजपा जिलाध्यक्ष पंकज गुप्ता, वीरेंद्र वर्मा, संजीव वर्मा, पंकज चौहान, भूपेंद्र सिंह समेत अनेक लोग मौजूद रहे।