अगिभनशमन विभाग और पुलिसकर्मी जिस वक्त आग पर काबू पाने की जद्दोजहद में
जुटे थे, उसी वक्त पिता और मां वहां खड़े होकर बच्चों को बचाने की गुहार
लगा रहे थे। बच्चों की जान जोखिम में देख स्थानीय लोग तीसरी मंजिल पर चढ़
गए, लेकिन मांगने के बाद भी दमकलकर्मी पानी नहीं पहुंचा पाए। वहीं परिवार
में अकेली बची नंदिनी स्कूल जाने के कारण जिंदा बच गई, जबकि दो मासूम बेबस
मां-बाप की आंखों के सामने उसी घर में जिंदा जल गए, जहां दोनो खेला करते
थे।
सुनील सक्सेना ने बताया कि आग लगने से पंद्रह मिनट पहले वो तीसरी
मंजिल पर घर में था और धर्मपाल के बेटे संजीव ने उसके पैर दबाए थे। लेकिन
उसे पता नहीं था कि पंद्रह मिनट बाद उसके कलेजे के टुकड़े आग से झुलस कर
मौत काल में सपा जाएंगे। सुनील ने बताया कि रोजाना सुबह स्कूल जाने से पहले
दोनों उसके साथ दुकान पर आते थे, लेकिन मंगलवार को कहने के बाद भी अंश और
संजीव दुकान पर नहीं आए।
वहीं मां रजनी यह सोचकर परेशान है कि काश आग लगने
पर वो अंश और संजीव के साथ नीचे आकर पति सुनील को आग लगने की सूचना देती तो
दोनों की जान बच जाती। जल्दबाजी में उठाया गया कदम और दो बच्चों की जान
जाने के गम को रजनी ताउम्र नहीं भूल पाएगी। सुनील ने बताया कि छोटी बेटी
नंदिनी जिद करके स्कूल चली गई थी। इसके चलते उसकी जान बच गई, वर्ना सब कुछ
बर्बाद हो जाता। वहीं मृतक बच्चों के बाबा बृज बिहारी लाल सक्सेना अपना होश
खो बैठे हैं।
पिता सुनील सक्सेना, मां रजनी, धर्मपाल और बुजर्ग बाबा
बृज बिहारी लाल को सब्र इसलिए भी नहीं हो रहा कि जिस घर में उनके दोनों
लाडले आंखों के सामने खेलते थे, मंगलवार को उसी घर में दोनो की पूरे परिवार
के सामने चिता जल गई और बेबस परिवार अपने बच्चों की जान बचाने के लिए कुछ
कर भी नहीं पाया। पूरे परिवार ने दोनो मौत के लिए पुलिस, फायर बिग्रेड
कर्मी, जिला प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।