एटा। चुनाव व्यवस्थाओं के मद्देनजर इस बार पूरी मंडी का अधिग्रहण करने की तैयारी चल रही है। 20 फरवरी को मतदान के बाद ईवीएम (इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन) मंडी में ही रखी जाएंगी। जबकि 10 मार्च को मतगणना होगी। तब तक मंडी समिति को आमजन के लिए पूरी तरह बंद रखा जाएगा। ऐसे में 20 दिन मंडी पूरी तरह बंद रहेगी। इससे करीब 60 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। मंडी में हर दिन करीब तीन करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
पिछले चुनावों में प्रशासन द्वारा मंडी में करीब पचास दुकानें अधिग्रहीत की जाती थीं। इनसे संबंधित ब्लॉक को बंद कर दिया जाता था। अन्य ब्लॉकों में मंडी के आढ़ती अपना व्यापार करते रहते थे। इस व्यवस्था में करीब 10 फीसदी कारोबार ही प्रभावित होता था, लेकिन इस बार पूरी मंडी के अधिग्रहण की तैैयारी चल रही है। वजह है कि इस बार कोविड प्रोटोकॉल को लेकर सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए अधिक जगह की जरूरत होगी।
मतगणना के बाद ही मंडी में कारोबार शुरू हो सकेगा। मंडी में 400 दुकानें हैं और 700 व्यापारी पंजीकृत हैं। जिनमें बड़े स्तर पर अनाज के अलावा सब्जी और फल का व्यापार होता है। व्यापारियों के मुताबिक हर दिन करीब तीन करोड़ का कारोबार होता है। 20 दिनों में करीब 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित होगा। 10 फरवरी से मंडी में सरसों आनी लगेगी। अनुमान है इस बार पांच हजार क्विंटल सरसों प्रतिदिन मंडी में पहुंचेगी।
पूर्व के चुनावों में कुछ दुकानें ली जाती रही हैं, शेष दुकानों में कारोबार चलता रहता था। यदि पूरी मंडी का अधिग्रहण किया जाएगा तो काफी नुकसान होगा। इस संबंध में अधिकारियों से बात कर अपना पक्ष रखेंगे। - प्रतीक गुप्ता, अध्यक्ष खाद्यान्न व्यापार मंडल
कोविड संक्रमण को देखते हुए विचार किया जा रहा है इस बार चारों विधानसभा की ईवीएम अलग-अलग रखकर मतगणना कराई जाए। पूरी मंडी के अधिग्रहण का विचार बनाया जा रहा है। कितनी जगह ली जाएगी, इसका निर्धारण प्रेक्षक और जिला निर्वाचन अधिकारी तय करेंगे। -सुनील कुमार सिंह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी