बदहाल बिजली सेवाओं का रोना रो रहे उपभोक्ताओं को सुविधाएं तो नहीं दी
लेकिन उनकी जेब से पैसा निकालने में बिजली विभाग सफल रहा। 97 प्रतिशत से
अधिक राजस्व वसूल चुके खंड ने बिजली चोरी पर भी लगाम लगाई। ऐसे में जहां गत
वर्ष की तुलना में आठ प्रतिशत कम बिजली खर्च हुई। वहीं औसत आपूर्ति के समय
में तीन घंटे की वृद्धि हुई है। जबकि पूर्व सालों में जिला वसूली देने
मेें फिसड्डी रहा है।
राजस्व वसूली में लक्ष्य से कोसों दूर और बिजली
चोरी पर अंकुश लगाने में नाकाम बिजली विभाग ने इस बार नए कीर्तिमान बनाए
हैं। लाइन लॉस घटाकर जहां विभाग को हर माह लगने वाली करोड़ों की चपत को कम
किया है। वहीं निर्धारित राजस्व वसूली के लक्ष्य के भी करीब रहा। वित्तीय
वर्ष के 42.77 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विपरीत खंड ने निर्धारित समय में
41.47 करोड़ का राजस्व निगम की झोली में डाल दिया। इतना ही नहीं खंड ने गत
वित्तीय वर्ष की तुलना में औसतन आपूर्ति भी बढ़ाई। जबकि बिजली चोरी पर लगे
अंकुश से विभाग को करोड़ों की राहत मिली है। प्राकृतिक आपदा वाले साल में
विभाग के इन कीर्तिमानों को शासन उपलब्धि मान रहा है।
बिजली वितरण शहरी खंड
2014-15 में शहरी खंड का राजस्व वसूली लक्ष्य-42.77 करोड़ रुपये
निर्धारित समय में वसूला राजस्व-41.47 करोड़
रिकवरी का प्रतिशत-97
वित्तीय वर्ष 2013-14 में प्रतिदिन की औसतन आपूर्ति-13.15 घंटा
2014-15 में प्रतिदिन की औसतन आपूर्ति-16.23
2013-14 में क्रय की बिजली-13.95 करोड़ यूनिट
2014-15 में क्रय कुल बिजली-12.75 करोड़
दक्षिणांचल के 21 जिले के 45 खंडों में पांचवा स्थान।
छापामार
कार्रवाई और सतत वसूली अभियान के चलते जहां राजस्व वसूली बढ़ी वहीं लाइन
लॉस पर भी अंकुश लगा। आपूर्ति के घंटे बढ़े साथ ही उपभोग घटा। इसके चलते
दक्षिणांचल के 45 खंडों में पांचवा स्थान मिला और सुधार के प्रयास जारी
हैं।
- राजीव चतुर्वेदी, अधिशासी अभियंता, शहरी खंड
विद्युत वितरण ग्रामीण खंड
वित्तीय वर्ष 2014-15 में राजस्व वसूली लक्ष्य-96.29 करोड़
2014-15 में राजस्व वसूली-93.89
लक्ष्य प्राप्ति का प्रतिशत-97.5 प्रतिशत
वित्तीय वर्ष 2013-14 में प्रतिदिन की औसतन आपूर्ति-8 घंटा
2014-15 में प्रतिदिन की औसतन आपूर्ति-10 घंटा
2013-14 का लाइन लॉस-37 प्रतिशत
2014-15 का लाइन लॉस-17 प्रतिशत
दक्षिणांचल में 40 वें स्थान पर रहा खंड 16 वें पर आया।
जर्जर
उपकरणों को बदलने के साथ ही अन्य अव्यवस्थाएं दूर की जा रही हैं। आने वाले
दिनों में ग्रामीण अंचल को और बेहतर सुविधाएं और आपूर्ति दी जाएगी।
- राजकुमार, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण खंड