आलू के भंडारण के लिए किसानों को दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। कई-कई दिनों तक आलू लदे वाहन लेकर वे कोल्ड स्टोरेज के बाहर इंतजार करने को मजबूर हैं। इससे शीतगृहों के सामने जाम के हालात बने हैं। वहीं कोल्ड स्टोरेज द्वारा आलू भंडारण के लिए बुकिंग भी नहीं की जा रही।
इस बार आलू की बंपर पैदावार हुई है। इससे किसान आलू की मंदी से परेशान हैं। वहीं शीतगृह में आलू के भंडारण के लिए भी उन्हें परेशान होना पड़ रहा है, क्योंकि ज्यादातर शीतगृह 70 फीसदी से ज्यादा फुल हो चुके हैं। इसके बाद भी आलू लेकर पहुंचने वाले किसानों की कतारें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। किसान अब अपने आलू भंडारण के लिए शीतगृहों पर जुगाड़ लगा रहे हैं। शीतगृह संचालक लगातार आलू भंडारण में असमर्थता जताने लगे हैं। ऐसी स्थिति में किसान परेशान हैं। वे एक के बाद दूसरे शीतगृह के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं आलू लदे वाहनों के खड़े होने से सर्कुलर रोड पर कई दिनों से जाम के हालात बने हैं।
फुटकर बाजार में भी मांग नहीं
कासगंज। होली के मौके पर बाजारों में आलू की मांग बढ़ जाती है। घर-घर चिप्स और पापड़ बनाए जाते हैं। इस बार कीमतें कम हैं, फिर भी बाजार से मांग नहीं निकल रही। फुटकर आलू का कारोबार करने वाले कारोबारी भी चिंतित हैं। आलू के फुटकर कारोबारी महाराज सिंह का कहना है कि ग्रामीण खरीदार बाजार में आलू की खरीद नहीं कर रहे हैं, क्योंकि गांव में या आसपास में जरूरतमंद लोग किसान से ही सीधा थोक भाव पर आलू खरीद लेते हैं। बाजार में शहरी क्षेत्र के लोग भी समीपवर्ती गांव में खेतों पर जाकर आलू ले आते हैं। उन्हें थोक मूल्य पर आलू मिल जाता है।