एटा। प्रदूषण के कारण शहर में छाई धुंध के कारण लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है। यहां तक की घर से बाहर निकलनेेेे पर लोगों को आंखों में भी जलन हो रही है। रविवार सुबह लोग जब घर से बाहर निकले तो लगा कि कोहरा आ गया है लेेकिन देखते ही देखते लोगों को सांस लेनेे में दिक्कत और आंखों में जलन महसूस होने लगी। सड़कों पर वातावरण कुछ ऐसा नजर आया जैसे दीपावली के बाद दिल्ली-एनसीआर का धुंध के बाद हो जाता है।
जिले में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) दोपहर 12:15 बजे 300 पर पहुंच गया। जबकि सामान्यत: एक्यूआई 50-100 के बीच होना चाहिए। इससे घरों से निकलते ही लोगों की आंखों में जलन होने लगी। वायुु प्रदूषण अधिक होने के कारण श्वांस रोगियों को न घर में चैन मिला और न बाहर। वहीं यातायात पुलिस भी मास्क पहनकर यातायात संचालित करती हुई दिखी।
जगह-जगह जलता कूड़ा और ईंट भट्टे भी हैं प्रदूषण का कारण
शहर में जगह-जगह जलाए जा रहे कूड़े और्र इंट भट्टे की प्रदूषण बढ़ाने का कारण हैं। इसके अलावा खेतों में लगातार जलाई जा रही पराली प्रदूषण बढ़ाने का मुख्य कारण हैं। एनजीटी के आदेश के बाद भी जिले के किसान पराली जला रहे हैं। इससे हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड के अलावा सस्पेंडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक जो 120 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए। बढ़कर 190 हो गई है।
चिकित्सकों का कहना है
जिले में प्रदूषण बढ़ गया है। लोगों को आंखों में जलन, पानी बहना आदि की समस्याएं आ रहीं है। वहीं आखों में इंफेक्शन की समस्या भी है। घरों से बाहर निकलते समय चश्मा लगाकर ही निकलें।
- डॉ. ललित गुप्ता, नेत्र रोग विशेषज्ञ
प्रदूषण बढ़ने से श्वांस रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है। जब तक प्रदूषण कम न हो तब तक लोगों को मास्क लगाकर ही घरों से निकलना चाहिए। वाहनों से निकलने वाला धुआं फेफड़ों को प्रभावित करता है।
-डॉ. प्रदीप गुप्ता, एमबीबीएस
खेतों में पराली न जलाई जाए इसके लिए गोष्ठियां कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं पराली जलाने वालों पर कार्रवाई के लिए लेखपालों से रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा गया है। - एमपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
पूरे दिन कुछ इस प्रकार घटा और बढ़ा प्रदूषण
समय-एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक)
2:15 - 260
3:15- 280
12:15- 300
13:30- 240
14:15- 180
15:30-140
16:30- 160
इस तरह करता है प्रदूषण परेशान
100 से अधिक एक्यूआई रहने पर लोगों को तेज चलने पर सांस लेनेेे में थोड़ी दिक्कत आती है। इसमें बार-बार सांस फूलती है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों को होती है।
200 से अधिक एक्यूआई रहने पर सांस फूलना, ड्राइविंग करते समय आंखों से पानी बना, जल्दी हांफना, बार-बार नाक बंद होना और हल्का सिर दर्द रहने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
250-300 तक एक्यूआई पहुंचने पर स्वस्थ व्यक्ति को भी आंखों में जलन, अधिक पानी आना, स्किन इंफेक्शन होना, खुले में सांस लेने में परेशानी होना, सिर दर्द बने रहना आदि समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता है।
शिकोहाबाद रोड पर छाई धुंध से होकर गुजरते बाहन- संवाद- फोटो : ETAH
कासगंज में वातावरण में छाई धुंध के कारण मास्क लगाकर गुजरती युवक नीरज देवी- फोटो : KASGANJ
शहर पर छाई धुंध का एक दृश्य- संवाद- फोटो : ETAH