आर्ट ऑफ लिविंग के छह दिवसीय हैप्पीनेस कोर्स में लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया और ध्यान योग के लाभ की बारीकियां जानी। ध्यान योग के जरिए किस तरह से तन, मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है यह जाना।
प्रशिक्षक राकेश अग्रवाल ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग शिविर में सहभागिता से मनुष्य को दिव्यता का अनुभव होता है। प्रत्येक व्यक्ति को इस शिविर में सहभागिता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु रविशंकर के दिव्य ज्ञान से सभी मनुष्य आनंदित हो रहे हैं। उनके बताए मार्ग लोगों के प्रेरणा बने हैं। द्वितीय प्रशिक्षक सरोज अग्रवाल ने बासुदेव कुटुंबकम का महत्व बताया। कहा, विविध धर्म को मानने वाले देश में आज भी इंसानियत सबसे ऊपर है। अगर हम इंसान हैं तो इंसानियत हमारी दिखनी चाहिए। कर्म करने के लिए सिर्फ मनुष्य ही है जिसे अच्छे, बुरे का आभास है। इसलिए वह अपने कर्मों को सुधारकर अपने को महान बना सकता है। उन्होंने गुरुदेव के दिव्य ज्ञान से भी शिविर में लोगों को अवगत कराया। नया शिविर 23-26 फरवरी सुबह 7-10 शाम को 4-7 बजे उनके निवास स्थान पर लगेगा।
उन्होंने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग के 35वीं वर्षगांठ पर अध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजन 11,12,13 मार्च को दिल्ली यमुना बैक, मयूर विहार, मेट्रो स्टेशन के सामने होगा। कार्यक्रम में 155 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित 35 लाख लोगों को जोड़ने की तैयारी है।