एटा। मनरेगा में मारहरा ब्लॉक के गांव सूरतपुर माफी में खेल किया गया। एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम मनरेगा जॉबकार्ड बनाए और हर सदस्य को अलग-अलग रोजगार देकर मजदूरी की रकम निकाली गई। मनरेगा लोकपाल की जांच में संकेत दिए गए हैं कि साल में 100 से अधिक दिनों का भुगतान पाने वालों से वसूली की जाएगी।
मनरेगा के तहत परिवार के मुखिया के नाम जॉबकार्ड बनाकर मजदूरी लायक सभी वयस्क सदस्यों के नाम दर्ज किए जाते हैं। एक परिवार को साल में अधिकतम 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। नियमों से इतर गांव सूरतपुर माफी में एक ही परिवार में कई-कई जॉबकार्ड बना दिए गए। इसके माध्यम से उन्हें मजदूरी दी गई। मामले की शिकायत गांव के ही रहने वाले प्रवीन बघेल ने मनरेगा लोकपाल से की। बताया कि एक ही परिवार के पति, पत्नी, अविवाहित बच्चों के अलग-अलग जॉबकार्ड जारी कर सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया गया है।
जांच के क्रम में मनरेगा लोकपाल ने बीडीओ मारहरा को पत्र जारी किया है। ऐसे मनरेगा मजदूरों की पूरी सारिणी भेजते हुए कहा है कि एमआईएस के माध्यम से इसकी पुष्टि करें। पूछा है कि 100 दिन से अधिक दिए गए भुगतान की वसूली क्यों न की जाए? इसे लेकर अब प्रधान और सचिव की गर्दन फंसती नजर आ रही हैं। दरअसल जो जॉबकार्ड बनाए गए हैं उनमें से कई अपात्र हैं। यहां तक कि मौजूदा प्रधान और उनके दो पुत्रों के भी जॉबकार्ड बने हुए हैं। संवाद