दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम आंकिचन धर्म की आराधना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर कर्मों की निर्जरा की।
शहर के 12 जिनमंदिरों में पर्यूषण पर्व की धूम मची हुई है। सुबह से ही अभिषेक, पूजन का दौर शुरू हो जाता है। दोपहर को तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का वाचन होता है। पुरानी बस्ती स्थित बड़े जैन मंदिर में शनिवार को उत्तम आंकिचन धर्म की महत्ता बताई। पंडित जयकुमार जैन ने कहा कि आंकिचन का अर्थ होता है, पर पदार्थों से मोह त्याग करना। वर्तमान में श्रावक मोह त्याग नहीं कर पाते हैं। उत्तम आंकिचन धर्म धारण करने से श्रावक में मोह और ममता का त्याग कर परमपद को पाता है। इसके बाद मंदिर में राष्ट्रीय जैन संघ परिवार द्वारा एक घंटे के णमोकार मंत्र पाठ का आयोजन किया गया।
प्रेमनगर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर नशिया में भक्तों ने सामूहिक पूजन किया। इस मौके पर भगवान पार्श्वनाथ का घी से अभिषेक किया गया। शाम को भक्तों ने भक्ति नृत्य कर प्रभु की आरती की। साथ ही महिलाओं ने बेजुबान पशुओं की आत्मशांति को णमोकार मंत्र पाठ का आयोजन किया। इस मौके पर योगेश जैन, अरुण, पवन, राजीव जैन, प्रवीन, अनिल, संजीव, प्रशांत, राहुल, रानू जैन, दीपक, अन्नू जैन, सतीश, जितेंद्र जैन, मधु, गीतांजलि जैन, ममता, बबिता जैन, मेघा जैन, मिंकी जैन, प्रिया जैन, प्रियंका आदि मौजूद रहे।
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आज होगा दशलक्षण पर्व का समापन
जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का समापन रविवार को होगा। बबिता जैन ने बताया कि रविवार को श्रावक-श्राविकाएं अनंत चतुर्दशी पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करेंगे। इस मौके पर भगवान वासुपूज्य को निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।