एटा। शहर में कॉलोनाइजर लोगों को सस्ते प्लॉट का झांसा देकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर खरीदारों को धोखा दिया जा रहा है। खेतों की बाउंड्रीवाल बनाकर अवैध कॉलोनियां बसा दी गई हैं। हैरानी की बात यह है कि 44 साल से प्रभावी विनियमित क्षेत्र में एक भी कॉलोनी का नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया। विभागीय अधिकारी अनजान बने रहे और अवैध कॉलोनियां बसती चली गईं।
एटा में विकास प्राधिकरण न होने के कारण निर्माण कार्यों की स्वीकृति और नक्शा पास करने की जिम्मेदारी विनियमित क्षेत्र प्राधिकारी की है। एटा शहर को 30 अक्टूबर, 1982 को विनियमित क्षेत्र घोषित किया गया था। पहले चरण में नगर पालिका क्षेत्र और आसपास के 10 गांव इसमें शामिल थे। 19 जनवरी, 2023 को सीमा विस्तार के बाद 27 अन्य गांव जोड़े गए।
विनियमित क्षेत्र में बिना अनुमति नहीं करा सकते निर्माण
नियमानुसार, विनियमित क्षेत्र में बिना अनुमति के कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य सुनियोजित विकास, अवैध निर्माण पर रोक और भूमि का उचित उपयोग सुनिश्चित करना है। यहां कॉलोनी या भवन बनाने, पुनर्निर्माण या खुदाई के लिए नियत प्राधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया में कॉलोनी के भू-उपयोग, नक्शा, खुला क्षेत्र, पार्क, सड़क, सीवर आदि की योजना की जांच की जाती है। एक मान्य कॉलोनी में 30 फीट चौड़ी सड़कें और 40 फीट का प्रवेश द्वार होना अनिवार्य है। कुल क्षेत्रफल का केवल 60-65 प्रतिशत हिस्से पर ही भवन बनाया जा सकता है, शेष में सड़क, पार्क और अन्य सुविधाएं होनी चाहिए। इन सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही नक्शा पास किया जाता है और सर्किल रेट के अनुसार राजस्व जमा होता है।
हर रोड पर कॉलोनियों की भरमार
पिछले कुछ वर्षों में कासगंज रोड, निधौली रोड, जीटी रोड, आगरा रोड, अलीगंज, शिकोहाबाद रोड सहित कई इलाकों में अवैध कॉलोनियां बड़ी संख्या में बस गई हैं। अधिकांश कॉलोनियां बिना नक्शा पास कराए बसाई गई हैं। कई कॉलोनाइजरों ने प्लॉट बेचने के बाद कॉलोनी की तरफ ध्यान ही नहीं दिया। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खरीदार अक्सर मकान नहीं बना पाते।
खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ
कॉलोनी के स्वीकृत न होने पर खरीदारों को अपने प्लॉट का नक्शा व्यक्तिगत रूप से पास कराना पड़ता है। इसके लिए सर्किल रेट के अनुसार, शुल्क जमा करना होता है जिसमें 50 हजार से एक लाख रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आ जाता है। प्लॉट का क्षेत्रफल और सर्किल रेट अधिक होने पर यह राशि और बढ़ जाती है।
स्वीकृति से बचते हैं कॉलोनाइजर
कॉलोनाइजर खुद को जिम्मेदारी से बचाने के लिए कॉलोनी स्वीकृत नहीं कराते। स्वीकृत कॉलोनी में उनके लिए प्रस्ताव के अनुसार सभी सुविधाएं देना अनिवार्य हो जाता है। ऐसा न करने पर खरीदार शिकायत कर सकते हैं जिसमें कॉलोनाइजर पर जुर्माने तक का प्रावधान है।
यह गांव हैं विनियमित क्षेत्र में
पहले चरण में शीतलपुर, एटा देहात, चौंचा बनगांव, असरौली, बारथर, पूंठ, चमकरी, घिलौआ, भगीपुर, चिलासनी गांव विनियमित क्षेत्र में शामिल किए गए। वर्ष 2023 में सीमा विस्तार के डांडा, मिश्री, निधौली खुर्द, यूसुफपुर नगला धानी, बहादुरगढ़, कासिमपुर, जवाहर अरथरा, ककरावली, विरामपुर, बमनई, छितौनी, दूल्हापुर, सिरांव, गिरौरा, दतई, रारपट्टी, कसैटी, नगला फरीद, लालगढ़ी, रामपुर घनश्याम, कुसाड़ी, मानपुर, लखीमपुर, सलेम सराय, सैंथरी, भदौं, बीगोर शामिल किए गए।
वर्जन
विनियमित क्षेत्र में स्वीकृति के बाद ही कॉलोनी का निर्माण मान्य है। अन्यथा कॉलोनी अवैध मानी जाएगी। ऐसी कॉलोनियों को चिह्नित कर अभियान चलाया जाएगा। लोगों से अपील है कि वे पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कॉलोनियों में प्लॉट खरीदें।
- राजकुमार मौर्य, नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र