एटा। विश्व श्रमिक दिवस पर जिले के श्रमिकों की स्थिति एक चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। श्रम विभाग और ई-श्रम पोर्टल के ताजा आंकड़े बताते हैं कि जिले में कुल पंजीकृत 1,17,869 श्रमिक अनुमानित हैं, जिमने सक्रिय श्रमिक 90 हजार ही हैं। हजारों मजदूर आज भी सरकारी सुरक्षा कवच से बाहर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से केवल ढाई हजार श्रमिकों को ही विभिन्न याेजनाओं का लाभ मिल पा रहा है।
अधिकांश श्रमिकों ने बताया कि ई-श्रम कार्ड बनने के बाद भी आधार लिंकिंग, मोबाइल अपडेट, और योजनाओं की जानकारी जैसी प्रक्रियाओं में दिक्कतें आती हैं। पेंशन, स्वास्थ्य सहायता और राहत राशि जैसी योजनाओं का लाभ अभी भी बड़ी संख्या में श्रमिकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। प्रवासी मजदूरों की शिकायत रही कि दूसरे राज्यों में ई-श्रम कार्ड की उपयोगिता लगभग शून्य है।
ई-श्रम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी भी ज्यादातर श्रमिकों को नहीं है। मजदूरों ने पंजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाने, जरिए कैंप लगाने व हेल्पलाइन को प्रभावी करने की मांग की है। श्रमिकों ने कहा कि मांगों में 400 रुपये से अधिक न्यूनतम मजदूरी, निर्माण स्थलों पर मुफ्त स्वास्थ्य जांच और पोर्टेबल ई-श्रम सुविधाएं मिलनी चाहिए। उधर श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंजीकरण अभियान लगातार जारी है और श्रमिकों को योजनाओं से जोड़ने के लिए कैंप लगाए जाएं। विभाग के अनुसार शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाती है हालांकि जमीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर पेश करती है। 90 हजार एक्टिव कार्डधारकों में से बड़ी संख्या में मजदूर अब भी किसी भी योजना से नहीं जुड़े है। केवल 2,000 से 2,500 श्रमिकों को ही अब तक विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल सका है। इनमें कन्या विवाह सहायता योजना, मातृ-शिशु बालिका सहायता योजना, संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिक मृत्यु-दिव्यांग सहायता व अटल आवासीय विद्यालय योजना शामिल हैं। जिले में ई-श्रम कार्ड का दायरा बढ़ाने के दावे तो बड़े हैं मगर लाभ मिलने की रफ्तार अभी भी सख्त सवाल खड़े कर रही है।
नहीं है ईएसआई अस्पताल
श्रमिको को इलाज के लिए ईएसआई अस्पताल बेहद जरूरी है। यह अभी जिले में नहीं है। हालांकि इसके लिए कासगंज रोड पर जमीन चिह्नित कर ली गई है। लेकिन इसके निर्माण में एक वर्ष से अधिक समय लग सकेगा।
हमारा ई-श्रम कार्ड तो बन गया, लेकिन फायदा आज तक नहीं मिला। कार्यालय में बस चक्कर ही काटते हैं। श्रमिकों के लाभ के बारे में कोई जानकारी नही है।
शहद सिंह, पल्लेदार
योजना का नाम तो बहुत है, पर हमें कोई बताता ही नहीं कि लाभ कैसे मिलेगा। मोबाइल लिंकिंग व दस्तावेज अपडेट में ही महीनों लग जाते हैं।
सामंत सिंह, पल्लेदार
श्रमिकों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से नवीनीकरण के बारे में लगातार जागरूक किया जाता रहा है। श्रमिक पंजीकरण कराने के बाद नवीनीकरण के लिए नहीं आते जिससे उन्हें मिलने वाली शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
राजबाबू, जिला श्रम प्रवर्तन अधिकारी