धान की खरीद 28 फरवरी की बजाय इस बार 31 जनवरी को ही समाप्त हो गई। इस बार जिले में इस बार मोटे चावल वाले धान की पैदावार कम होने के चलते ऐसा हुआ। दूसरी ओर विभाग की मानें तो शासन की मंशा यह भी है कि धान की खरीद जल्द समाप्त होने के बाद खाद्य विपणन विभाग को गेहूं की खरीद की तैयारियों के लिए सही समय मिल जाएगा। विभाग को एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू करने में दिक्कत आती थी और हर साल खरीद देर से ही शुरू हो पाती थी। इस बार शासन ने निर्धारित धान खरीद के कुल लक्ष्य के सापेक्ष 11.77 प्रतिशत ही धान की खरीद हो सकी है।
जिले में एक माह पूर्व ही धान की खरीद समाप्त हो चुकी है। लगभग तीन माह तक चली धान की खरीद के दौरान विभाग ने कुल 706.60 एमटी ही धान की खरीद की। जो पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मोटे चावल वाले धान की पैदावार जिले में साल दर साल कम होती जा रही है। विभाग ने इस बार जितनी भी जिले में धान की खरीद की थी, उसे धान मिलों को भेज दिया है। जहां धान से चावल निकालने का काम चल रहा है। इसके बाद चावल को एएफसीआई भेज दिया जाएगा।
विभाग ने बताया कि शासन ने धान खरीद के नियमों में फेरबदल कर दिया है। इसके चलते धान की खरीद जिले में 31 जनवरी को ही समाप्त कर दी गई है। अब विभाग गेहूं की खरीद के लिए तैयारियां शुरू करेगा।
धान खरीद का ब्योरा
विभाग लक्ष्य खरीद
खाद्य विभाग 1500 एमटी 343.90 एमटी
पीसीएफ 3500 एमटी 80.60 एमटी
यूपीएसएस 500 एमटी 282.10 एमटी
एफसीआई 500 एमटी -
कुल 6000 एमटी 706.60 एमटी
धान की खरीद 31 जनवरी को समाप्त हो चुकी है। इस दौरान जिले में कुल 706.60 एमटी धान की खरीद हुई। विभाग अब गेहूं खरीद की तैयारी करेगा।
- वीपी सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी