एटा। जिले में खाद संकट को लेकर अफवाहें फैली हुई हैं। इसकी वजह से किसान सुबह से साधन सहकारी समितियों पर जमा हो जाते हैं और लाइनें लगाकर खाद खरीद रहे हैं। इसको लेकर प्रशासन और संबंधित विभाग की ओर से सतर्कता बरती जा रही है। मंगलवार को तीनों तहसीलों क्षेत्रों में अधिकारियों ने छापे मारी कर स्थिति का जायजा लिया। दो का स्टॉक सही नहीं पाए जाने पर नोटिस जारी किए गए हैं।
जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह के निर्देश पर मंगलवार को छापे मारे गए। उप जिलाधिकारी सदर राज कुमार मौर्य, उप जिलाधिकारी अलीगंज जगमोहन गुप्ता, तहसीलदार अलीगंज संदीप सिंह और जिला कृषि अधिकारी मनवीर सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने अपनी टीम के साथ विभिन्न खाद दुकानों का निरीक्षण किया और खाद वितरण की स्थिति का जायजा लिया।
जिला कृषि अधिकारी मनवीर सिंह ने बताया कि खाद की कोई कमी नहीं है, फसल की जरूरत के अनुसार ही खाद खरीदें और अनावश्यक भंडारण से बचें। बताया कि मै. प्रदीप दीक्षित खाद भंडार बिल्सड अलीगंज रोड और उमा बीज भंडार बसुंधरा कोस्टॉक और बिक्री रजिस्टर अपूर्ण होने पर नोटिस दिया गया।
नायब तहसीलदार ने खाद की दुकानों का किया निरीक्षण
राजा का रामपुर। मंगलवार को थाना क्षेत्र के कस्बा सहित ग्राम पहरा की दुकानों का नायब तहसीलदार अरविंद कुमार गौतम ने लेखपाल रामप्यारे के साथ में दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खाद की दुकानों पर यूरिया खाद की रेट लिस्ट को देखा गया। वहीं नायब तहसीलदार अरविंद कुमार गौतम ने रास्ते में खाद ले जा रही किसानों से खाद के दामों को लेकर वार्ता की। जहां सभी दुकानों पर रेट सही पाए गए और किसी भी दुकान पर डीएपी खाद नहीं मिली।नायब तहसीलदार अरविंद कुमार गौतम ने बताया कि किसानों को उचित दर पर डीएपी और यूरिया खाद उपलब्ध कराना शासन की मंशा है जिससे किसानों का कहीं भी अहित न हो सके। जिसके लिए तहसील स्तर के सभी अधिकारी और कर्मचारी भ्रमण कर खाद की दुकानों की जांच कर रहे हैं। संवाद
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है खाद
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। यूरिया 22,552.77 मैट्रिक टन, डीएपी 5,484.18 एमटी, एनपीके 4,390.96 एमटी, एसएसपी 988.95 एमटी और एमओपी 4,622.4 मीट्रिक टन उपलब्ध हैं। आग्रह किया कि किसान घबराएं नहीं और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। अनावश्यक भंडारण न करें और फसल की आवश्यकताओं के अनुसार ही खाद का उपयोग करें, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहे।