एटा। तमाम बेघर मकान बनवाने के लिए सरकारी मदद को तरस रहे हैं। उधर, अफसरों की मेहरबानी से दो-दो बार पैसा दिया जा रहा है। शहर से सटे चौंचा वनगांव में एक आवेदक पर अफसर मेहरबान हुए तो डूडा और ब्लॉक दोनों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे मकान बनवाने के लिए पैसा दे दिया गया। शिकायत हुई तो दोनों ही विभाग खुद को सही ठहरा रहे हैं।
शीतलपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव चौंचा वनगांव निवासी कृष्णा देवी ने पूर्व में पीएम आवास योजना ग्रामीण का लाभ उठाया। विकासखंड अभिलेखों के अनुसार 2019-20 में योजना के अंतर्गत उन्हें 1.20 लाख रुपये दिए गए। उनका बाकायदा सत्यापन किया गया और यह गांव ग्रामीण क्षेत्र में ही आता है। इसके करीब चार साल बाद महिला ने पीएम आवास योजना शहरी के अंतर्गत लाभ पा लिया। डूडा (जिला नगरीय विकास अभिकरण) के अभिलेखों के मुताबिक 19.10.2023 को उनके मकान निर्माण के लिए स्वीकृति दी गई थी। दोनों ही विभाग खुद को सही ठहरा रहे हैं, लेकिन एक ही व्यक्ति को एक योजना में दो जगह से लाभान्वित किया ही नहीं जा सकता।
जांच प्रक्रिया पर सवाल
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में जांच का स्तर काफी कड़ा किया गया है। खासतौर से शहरी क्षेत्र के अंतर्गत कई स्तर पर जांच होती है। इसमें डूडा के अलावा संंबंधित नगर निकाय, लेखपाल की भी जांच रिपोर्ट लगती है। इस मामले में भी यदि ये सब जांचें हुईं फिर भी कैसे गड़बड़ी हो गई। ऐसे में जांच प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत पीएम आवास योजना की प्रक्रिया ब्लॉक स्तर से होती है। मेरे पास अभी शिकायत नहीं आई है। मिलने पर प्रकरण की जांच कराई जाएगी। - प्रभूदयाल, बीडीओ शीतलपुर
नगर पालिका और राजस्व विभाग की ओर से जांच कराई गई थी। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर आवेदन स्वीकृत किया गया। शिकायत की जांच कराई जाएगी। - सुभाषवीर राजपूत, पीओ डूडा