बैठक में लेते डीएम सुखलाल भारती।
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एटा। बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए सरकार पोषण आहार से लेकर इलाज तक की सुविधाएं मुफ्त मुहैया करा रही है। अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) तक पहुंचाने में जिम्मेदार आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लापरवाही बरत रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब 1756 बच्चे अतिकुपोषित हैं, लेकिन पिछले छह माह से एनआरसी तक दो सौ बच्चे भी नहीं पहुंच सके हैं।
एनआरसी पर बच्चों को भर्ती कराने से लेकर उनके स्वस्थ होने तक मॉनीटरिंग करनी पड़ती है। पहले अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। फिर उनके अभिभावकों को 14 दिन तक केंद्र पर रहने के लिए राजी करना पड़ता है। केंद्र पर पहुंचाने के बाद उनके इलाज और फिर छुट्टी करने के बाद उनकी जानकारी जुटानी पड़ती है। इस कड़ी में कहीं कोई खामी रह जाए तो कार्रवाई की आशंका रहती है। ऐसे में इस प्रक्रिया से बचने के लिए जिम्मेदार बच्चों को केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे।
यह मिलती हैं सुविधाएं
एनआरसी पर बच्चों की देखभाल की पूरी व्यवस्था है। यहां भर्ती होने वाले बच्चे को भोजन, फूड सप्लीमेंट नि:शुल्क दिया जाता है। वहीं इलाज भी होता है। अतिकुपोषित बच्चे को 14 दिन तक भर्ती किया जाता है। छुट्टी होने के बाद चार बार बच्चे की मॉनीटरिंग भी की जाती है।
आंकड़ों पर एक नजर
अतिकुपोषित बच्चे- 1756
आंशिक कुपोषित- 10273
सामान्य कुपोषित- 175869
कोरोना के चलते शासन की गाइडलाइन है कि दस वर्ष से कम के बच्चे बाहर न निकलें। इसके चलते कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। परिजन उन्हें अस्पताल लाने में डर रहे हैं। वहीं स्वास्थ्यकर्मियों पर एनआरसी पहुंचाने की जिम्मेदारी है। वह कोरोना की सर्विलांस टीम में लगे हैं। बच्चों के घर-घर पोषण आहार का वितरण कराया जा रहा है। -संजय कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा बच्चों को एनआरसी वार्ड में नहीं लाया जा रहा है वहीं जो बच्चे ओपीडी में पहुंच रहे हैं, उनके परिजन उन्हें केंद्र में भर्ती करने को तैयार नहीं होते हैं। -डॉ. वैभव गुप्ता, पोषण पुनर्वास केंद्र प्रभारी