नोटबंदी के 50 दिन:
खूब दी मोहलत, फिर भी राहत दूर
नकदी नहीं आने से बढ़ती जा रही लोगों की दिक्कत
जिले की बैंकों के बाहर लग रही लोगों की कतारें
- 815 करोड़ रुपये जमा हो पाए जिले की बैंकों में
- 600 करोड़ की नई करेंसी बैंकों को मिली
- 200 करोड़ की पुरानी करेंसी बैंकों पर
- 200 करोड़ की करेंसी प्राइवेट बैंकों ने चेस्ट से मंगाई
- 100 करोड़ की करेंसी आसपास के जिलों से मंगाई
- 12 लाख खाताधारक है पूरे जिले में
- 142 बैंक शाखाएं है पूरे जिले में
10 फीसदी एटीएम ही कर सके नकदी निकासी
केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी को शुक्रवार को 50 दिन पूरे हो रहे हैं, लेकिन लोगों के हाथ अब तक खाली हैं। 50 दिन बाद भी हालात में सुधार नहीं है। हालांकि बैंकों के बाहर कतारें छोटी हुई हैं, लेकिन इसका कारण नकदी संकट है। वहीं जिले में अब तक महज 10 फीसदी एटीएम ही चालू हो सके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौ नवंबर को 500 और एक हजार के नोट बंद करते समय जनता से 50 दिन का वक्त मांगा था। इस दौरान 30 दिसंबर तक पुराने नोटों को बदलने की समय सीमा तय की गई थी। लोगों ने भी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए बैंक में लाइन में लगकर अपने पुराने नोट जमा किए, लेकिन नकदी निकासी नहीं हो पाने से हाथ खाली रह गए। बैंकों को पर्याप्त करेंसी नहीं मिल पाने से नकदी संकट बना रहा। बीच-बीच में कभी दो हजार, कभी चार हजार रुपये बैंकों ने बांटकर लोगों को राहत देने की कवायद की, लेकिन वो भी कारगर साबित नहीं हो सकी। ऐसे में 50 दिन पूरे होने के बाद भी बैंकों के बाहर कतार लगने का सिलसिला थमा नहीं है। तब्दीली बस इतनी है कि बैंकों के बाहर लाइनें छोटी जरूर हुई हैं, लेकिन राहत अब भी दूर है।
लीड बैंक की मानें तो जिले की 142 बैंक शाखाओं, निजी बैंक और डाकघर में अभी तक तक 815 करोड़ रुपये के पुराने 500 और 1000 रुपये के बदले गए और खातों में जमा कराए गए हैं। जबकि बैंकों में अभी भी पुराने नोट की गिनती जारी है। वहीं नोटबंदी के बाद से जिले की बैंकों को आरबीआई से करीब 600 करोड़ से अधिक नई करेंसी मिली है और 200 करोड़ के करीब बैंकों के पास नोटबंदी से पहले के 100, 50, 20, 10 रुपये के नोट और 10 रुपये के सिक्के थे। कैश कम होने पर सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने आसपास जिलों के शाखाओं और करेंसी चेस्ट से करीब 200 करोड़ रुपये मंगाकर वितरित किए। लीड बैंक की माने तो जिले के बड़े व्यापारियों, कारोबारियों, ग्राहकों ने बैंक शाखाओं में करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक नए नोट और पुराने छोटे नोट जमा कराए हैं, लेकिन नकदी संकट अब भी बरकरार है।
एटीएम नहीं दे सके राहत
नोटबंदी के बाद सरकार ने एटीएम से धन निकासी की सीमा दो हजार रुपये तय कर दी, लेकिन एटीएम नए नोटों के हिसाब से अपडेट नहीं हो सके। जिले के 100 एटीएम को अपडेट कराया गया, लेकिन नकदी संकट के चलते एटीएम से नकदी की निकासी नहीं हो सकी। ऐसे में एटीएम के बाहर लाइनें लगती नजर आईं। जिले में अब भी महज 10 फीसदी एटीएम से धन निकासी हो पाई है।