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नोटबंदी : बैंकों में खत्म नहीं हो रही कतार

Wed, 28 Dec 2016 12:17 AM IST
Amar Ujala
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नोटबंदी : बैंकों में खत्म नहीं हो रही कतार - फोटो : Amar Ujala
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 नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने में एक दिन ही बचा है लेकिन बैंकों में और एटीएम के बाहर लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही। इतना जरूर है कि लाइन पहले की अपेक्षा छोटी लग रही है और लोगों को इंतजार भी कुछ कम करना पड़ रहा है। हालांकि सहकारी और ग्रामीण बैंकों में कैश की किल्लत से किसानों को अब भी ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं उद्योग, बाजार, कारोबार में मंदी से बेरोजगार हुए मजदूर बेहाल हैं। लोगों की निगाहें मोदी सरकार के अगले कदम पर टिकीं हैं, वे बेसब्री से 30 दिसंबर का इंतजार कर रहे हैं।
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दरअसल किसानों की आर्थिक गतिविधियां तकरीबन 100 प्रतिशत सहकारी बैंकों, समितियों व ग्रामीण बैंकों पर निर्भर हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की बैंक शाखाएं अब भी नकदी संकट से जूझ रहीं हैं। नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने में एक दिन ही शेष है पर किसानों के  पास खाद, बीज व सिंचाई के लिए डीजल खरीदने को पैसे नहीं हैं। मंडी में नकदी संकट होने से धंधा मंदा है। किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा।


शहरों व कस्बों में हालात में पहले के मुकाबले सुधार है, लेकिन वेतन और पेंशनभोगी से लेकर लघु उद्यमी, व्यापारी, कारोबारी बड़े खर्च के लिए नकदी जुटाने के लिए सोचने पर मजबूर हैं। जलेसर का घंटा-घुंघरू हो या अवागढ़ में बीज उत्पादक कारोबार, सब ठहर सा गया है। ईट भट्ठों पर मंदी की मार है। ऐसे में लघु उद्यमी, भट्ठा कारोबारी, मंडी से जुड़े  मजदूर परेशान हैं। मजदूर और कारीगर तो बेरोजगारी का दंश झेलने को विवश हैं।
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आवेदन किया पर नहीं मिली स्वाइप मशीन


कैशलेस व्यवस्था के लिए व्यापारियों ने स्वाइप मशीन के आवेदन किए, लेकिन बैंक सिमकार्ड नहीं दे पा रहे। पेटीएम एप डाउनलोड करने पर नेटवर्क कनेक्टिविटी समस्या खड़ी कर रहा है।
बैंकों में पर्याप्त मात्रा में कैश न होने से दिक्कत


बैंकों और एटीएम में पर्याप्त मात्रा में कैश न होने के कारण समस्या बनी हुई है। लीड बैंक केनरा, ग्रामीण बैंक की 44, सहकारी बैंक की 27 शाखाओं में कैश नहीं है। इस कारण लोगों को बैंकाें से जरूरत भर कैश नहीं मिल रहा। हालांकि बाजार में 500 रुपये के नये नोट आने से ग्राहकों और व्यापारियों को कुछ राहत जरूर मिली है।

भट्ठा व्यवसायी हरीओम गुप्ता बताते हैं कि नोटबंदी के कारण इस बार ईंटों की बिक्री 50 प्रतिशत गिर गई है। मजदूरी नही मिलने के कारण मजदूर पलायन कर चुके हैं। यही नहीं, सीमेंट, मौरम, ईंट, गिट्टी और सरिया कारोबार भी प्रभावित है।
घंटा-घुंघरू कारोबारी कपिल गुप्ता बताते हैं कि नोटबंदी से कारोबार 80 प्रतिशत गिरा है। मजदूर पलायन कर गए हैं। फैक्ट्रियों में कामकाज ठप है। व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बैंकाें से जरूरत भर कैश नहीं मिल रहा। पुराना माल बिका चुका है, लेकिन भुगतान नहीं मिला।
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