जिले में अब तक शासन ने एफसीआई के क्रय केंद्र को हरी झंडी नहीं दी है। वहीं कासगंज के सिढ़पुरा में एफसीआई के एक केंद्र पर गेहूं की खरीद होगी। अनुमान है कि जिले में शायद इस बार एफसीआई का क्रय केंद्र नहीं बनेगा। इसका कारण गेहूं और धान की खरीद में निगम की ओर से अब तक की गई लापरवाही माना जा रहा है।
विगत वर्षों में गेहूं खरीद के लिए शासन की ओर से खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएस, यूपी एग्रो एवं कर्मचारी कल्याण निगम के साथ एफसीआई को भी गेहूं खरीद की अनुमति मिलती रही है। गत वर्ष भी एफसीआई के एक क्रय केंद्र को शासन की ओर से मंजूरी मिली थी, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष निगम गेहूं की खरीद नहीं कर पाया। यहां तक कि वर्ष 2015 में जिले में हुई धान की खरीद में भी एफसीआई की लापरवाही सामने आई। धान खरीद के लिए एफसीआई को जहां एक हजार एमटी के आसपास धान खरीदने का लक्ष्य मिला था, वहीं निगम इसके सापेक्ष एक से दो प्रतिशत भी धान की खरीद नहीं कर पाया। इसकी वजह से खाद्य विभाग को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर मंडल स्तर पर की गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसके चलते ही एफसीआई का जिले में गेहूं के लिए क्रय केंद्र की अनुमति दी जा रही है। अब जबकि गेहूं की खरीद जिले में दो तीन दिन में शुरू होने वाली है, ऐसे में एफसीआई के क्रय केंद्र को अनुमति मिल पाना मुश्किल दिख रहा है।
-----
क्या कहते हैं अधिकारी
शासन की ओर से खाद्य विभाग, पीसीएफ, यूपीएसएस, यूपी एग्रो एवं कर्मचारी कल्याण निगम के 74 क्रय केंद्रों को गेहूं खरीद की अनुमति दी गई है। अभी तक एफसीआई का जिले में कोई क्रय केंद्र नहीं खोला गया है। क्रय केंद्र अब तक अनुमति क्यों नहीं मिली है, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है।
- जितेंद्र यादव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी, एटा।