मनुष्य जाति को सिर्फ और सिर्फ नफरत से दूर रहना चाहिए इस एक गुण में ही कई गुण समाहित हैं। एक गुण को ग्रहण करने से मुनष्य के कई अवगुण स्वत: ही दूर हो जाते हैं।
यह विचार निरंकारी महात्मा गिरीश ने सत्संग के दौरान कहे। उन्होंने कहा कि इंसान संसारिक पदार्थों में इतना व्यस्त है कि उसे अपने जीवन के असली लक्ष्य का ध्यान नहीं। ईश्वर का दिया गया मनुष्य रूपी अनमोल जीवन मनुष्य यूं ही गवा रहा है। इंसान के रूप में जन्मे हैं तो इंसानियत के कर्म तो करने होंगे तब ही इंसान की पहचान कायम रह सकेगी। हर मनुष्य को चाहिए कि हमारी संस्कृति के जन्मदाता साधु संतों को भूलकर भी अपमान न होने पाए। जब भी हम किसी संत महापुरुष का अपमान कर रहे होते है उस समय हम अपने कई पुण्यों का स्वत: नाश कर रहे होते हैं। सत्संग के दौरान मीडिया प्रभारी अनिल चंद्रा, खूब सिंह, देवेन्द्र सक्सेना, रामप्रकाश, पंकज, अजब सिंह, ताराचंद्र, हरिओम, किशन गौड़, महावीर यादव आदि मौजूद रहे।