ईंट भट्टा संचालकों की प्रांतीय स्तरीय बैठक बुधवार को संपन्न हुई। राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों की मौजूदगी में चल रही वित्तीय वर्ष 2015-16 में ईट भट्टा संचालन को बंद रखने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा रॉयल्टी एवं वाणिज्य कर आदायगी न करने का निर्णय लिया गया, जिससे सरकार के कानों तक भट्ठा संचालकों के विरोध की आवाज गूंज सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महामंत्री रविंद्र कुमार तिब्तिया ने कहा कि स्वच्छता प्रमाण पत्र (एनजीटी) की जरुरत ईट भट्टा संचालन के लिए नहीं है। यह व्यवस्था पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने कहा कि सरकार ईट भट्टा कारोबारी पर अनावश्यक प्रमाण पत्र का दबाव बना रही है। इसकी जटिल औपचारिकताएं कारोबारी पूरी नहीं कर सकते। उन्होंने एकजुट होकर सभी कारोबारियों से भट्टों के संचालन के बंद करने के आंदोलन को सफल बनाने की अपील की। प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि ईट भट्टा कारोबारियों की चिमनियों से प्रदूषण नहीं होता। चिमनी में सेटलिंग चेंबर होता है वहीं चिमनी की ऊंचाई 110 फीट होती है। उन्होंने कहा कि रॉयल्टी और वाणिज्य कर की अदायगी कारोबारी नहीं करेंगे। भट्टा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुभाष गर्ग ने कहा कि भारत सरकार अनावश्यक तौर पर एनजीटी की बाध्यता थोप रही है। इसे कारोबारी किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बैठक में निर्णय लिया गया है कि जहां करों की अदायगी नहीं होगी वहीं भट्टा कारोबारी मजदूरों की बुकिंग भी नहीं करेंगे।
प्रांतीय बैठक में हाथरस, बंदायू, फर्रुखबाद, एटा सहित विभिन्न जनपदों के कारोबारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन महामंत्री राकेश गर्ग ने किया। इस दौरान जिला इकाई के दीपक मेहरा, विजय अग्रवाल, अजय कुमार, जान मोहम्मद, भगवान शंकर, लालसिंह, गोपाल माहेश्वरी, शेलेंद्र माहेश्वरी सहित तमाम अन्य लोग मौजूद रहे।