गर्मी के मौसम में भी शासन खराब हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा है। जलनिगम के पास हैंडपंपों के रीबोर कराने के लिए बजट ही नहीं है। जिले की 423 ग्राम पंचायतों के 725 गांवों में 17,194 हैंडपंप लगे हुए हैं।
्रप्रतिवर्ष ही काफी संख्या में हैंडपंप खराब हो जाते हैं। इससे ग्राम पंचायतों में पेयजल की किल्लत हो जाती है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में शासन से 700 हैंडपंप के रीबोर के लिए बजट मांगा गया, लेकिन पर्याप्त धन न मिल पाने से मात्र 300 हैंडपंप ही रीबोर हो सके। जिन ग्राम पंचायतों में हैंडपंप ठीक नहीं हो सके उनके ग्रामीण पूरे वर्ष पानी के लिए परेशान रहे। वित्तीय वर्ष 2016-17 में शासन से बजट मिला ही नहीं।
जिले के विकास के लिए बनाई जाने वाली 2017-18 की जिला योजना में जल निगम ने 1000 हैंडपंप के रीबोर के लिए 5.31 करोड़ रुपये की मांग की है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक माह गुजरने जा रहा है, लेकिन अभी तक शासन से कुछ नहीं मिला है।
इससे हैंडपंपों के रीबोर होने का कार्य शुरू ही नहीं हो पा रहा। जिले की कोई भी ग्राम पंचायत ऐसी नहीं हैं जहां दो चार हैंडपंप खराब न हों। भीषण गर्मी के मौसम में ग्रामीण हैंडपंपों के खराब होने से काफी परेशान हैं। उनके सामने पेयजल का गंभीर संकट है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
जिला योजना में 1000 हैंडपंप रीबोर के लिए 5.31 करोड़ रुपये की मांग की गई है। अभी जिला योजना से धन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो सकी है, इससे हैंडपंप रीबोर नहीं हो पा रहे
-डीके सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम