राजकीय प्रदर्शनी में मंगलवार रात को आल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें अलग-अलग जगहों से आए शायरों गजल एवं शायरी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरूआत मुम्बई से आए वाहिद अंसारी की शायरी दुनिया की हर खुशी को हमारा सलाम है, हमको तो बस रसूल की चौखट से काम है से हुई। इलाहाबाद के मीसम गोपालपुरी ने गजल में कहा इतना बेजान हूं एहसास के मारों की तरह, फूल चुभते हैं मेरे जिस्म में खारों की तरह। रिफत जमाल पुरकाजी ने कहा कि मोहब्बत का वो नाजुक सा जमाना याद आता है, मेरा रूठना उसका मनाना याद आता है। एजाज अंसारी ने कहा कि बहुत दिन तक न मिलने से तालुक्क मर भी जाता है। नूर धोलपुरी ने कहा कि मेरे मालिक रोक दे, अब तो नफरत के तूफान को, जाने किस की नजर लगी मेरे हिंदुस्तान को। इस मौके पर नदीम देवबंदी, अयाज औरय्यावी, हसन काजमी, जीनत मुरादाबादी, अरशद जिया, सज्जाद झंझट आदि ने गजल और शायरी पेश की। संयोजक कशिश एटवी ने शायरों और अतिथियों को सम्मानित किया। अध्यक्षता हाजी केसर अली ने की। मुशायरे का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी ने किया। मुख्य अतिथि बसपा नेता गजेंद्र सिंह चौहान थे। इस मौके पर अबरार अहमद, अफसार बरकाती, आबेज अली, सईद सलमानी, गुफरान कुरैशी, जीशान, नावेद, सोहेल, आदिल, अल्जेब, इंतजार हुसैन मौजूद थे।