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बंदरों का उत्पाद, मकान बने जेलखाने

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स्टेट बैंक कॉलोनी में बंदरों के आतंक से परेशान लोगों ने मकान में लगवाया गया जाल - फोटो : KASGANJ
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कासगंज। नगर में बंदरों के भय से लोगों ने मकानों के सामने और छतों पर लोहे के जाल लगवा रखे हैं। उत्पाती बंदर हमला न कर दें। इसलिए लोग घरों में जेल की तरह रहने को मजबूर हैं।
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बंदरों की बढ़ी हुई संख्या एवं जानलेवा हमले से लोग परेशान हैं। पिछले दो दिनों में ही दो लोगों की जान बंदरों के हमले में चली गई। छतों पर लोग बिना लाठी-डंडों के नहीं जा सकते। मकानों की छतों, गलियों में बंदर झुंड बनाकर घूमते रहते हैं। गलियों से कोई सामान लेकर निकलना भी दूभर हो जाता है।
बंदर कभी भी हमला कर लोगों को घायल कर देते हैं। वहीं छतों पर महिलाएं कपड़े आदि सुखाने जाती हैं तो भय बना रहता है। सुबह के समय स्कूल जाते बच्चों के साथ अभिभावकों को स्वयं जाना पड़ता है। बंदरों के बढ़ते हमलों के खतरे के मद्देनजर लोगों ने घरों के सामने और छतों पर लोहे के जाल बिछा रखे हैं।
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इन बस्तियों में अधिक है संख्या
माधौपुरी, पंखवाला बाग, पीएलजीसी कॉलोनी, मोहल्ला जय जयराम, लवकुशनगर, तहसील रोड, छपट्टी गली, प्रभुपार्क क्षेत्र, सोरों गेट, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन सहित तीर्थनगरी सोरों एवं सहावर में बंदरों की संख्या अधिक है।
लगवाने पड़ रहे जाल
बचाव के लिए लोहे के जाल लगवाने पड़ रहे हैं। बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। बंदरों को पकड़वाया जाए। - कपिल शक्ची, न्यू माधौपुरी कॉलोनी।
गलियों में रहते हैं
गलियों में सुबह के समय बंदर झुंड बनाकर घूमते नजर आते हैं। हमले से बचने के लिए स्वयं ही बच्चों को छोड़ने जाना पड़ता है। - बब्बू, स्टेट बैंक कॉलोनी।
अनुमति दी जाएगी
जनपद के सभी निकायों के ईओ से वार्ता की गई है। बंदरों को पकड़ने वालों के मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए गए हैं। यदि ईओ प्रस्ताव देते हैं तो बंदरों को पकड़ने के लिए अनुमति दी जाएगी। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ, कासगंज।
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