एटा। जिले के एतिहासिक शहर मारहरा क्षेत्र को अब तहसील का दर्जा नहीं मिलेगा। शासन को राजस्व परिषद ने मारहरा को तहसील नहीं बनाने की रिपोर्ट भेजी है। लंबे समय से तहसील बनाने की मांग की जा रही थी। कमिश्नर और डीएम ने राजस्व परिषद के निर्देश पर क्षेत्र के हालात की रिपोर्ट भेजी थी। मगर लेखपाल क्षेत्र कम होने से मारहरा तहसील बनाने के मानक पूरे नहीं कर पा रहा है।
जिले के मारहरा क्षेत्र में नगर पालिका, ब्लॉक, थाना और बड़ा नगरीय क्षेत्र है। बीते दिनों क्षेत्र को तहसील बनाने की मांग उठी, तो राजस्व परिषद ने कमिश्नर और डीएम से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने जांच कराई तो पाया गया कि मारहरा क्षेत्र में 55 लेखपाल क्षेत्र आते हैं और 187 गांव हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद जब मानकों को जांचा गया तो पाया गया कि तहसील क्षेत्र बनाने के लिए 100-120 लेखपाल क्षेत्र आवश्यक हैं। इसके चलते मारहरा को तहसील नहीं बनाए जाने की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव शासन को भेजी गई है। राजस्व परिषद के आयुक्त सुनील झा ने रिपोर्ट में कहा है कि लेखपाल क्षेत्र कम होने से मारहरा को तहसील नहीं बनाया जा सकता है। इसके बाद मारहरा की तहसील बनने की उम्मीद टूट गई है।
विश्व प्रसिद्ध दरगाह है मारहरा की पहचान
धार्मिक दृष्टि से मारहरा क्षेत्र भी काफी अहमियत रखता है। यहां विश्व प्रसिद्ध दरगाह खानकाह-ए- बरकातिया है। जिसके चलते यहां हर साल लाखों जायरीन पहुंचते हैं।
सुलभ नहीं है सड़क परिवहन साधन
मारहरा क्षेत्र में परिवहन को लेकर दुविधा का सामना करना पड़ता है। एटा से मारहरा तक के लिए सड़क मार्ग पर रोडवेज बसें कम हैं। जबकि मारहरा में रेलवे स्टेशन है जो कि कासगंज-मथुरा रेल मार्ग में आता है।
विधानसभा क्षेत्र भी है मारहरा
मारहरा को विधानसभा क्षेत्र का भी दर्जा है। यहां कुल 380 पोलिंग बूथ हैं। यहां कुल जनसंख्या 47772 है। मौजूदा दौर में क्षेत्र से भाजपा के वीरेंद्र सिंह लोधी विधायक हैं।
अतरंजी खेड़ा भी प्रमुख पर्यटन क्षेत्र
मारहरा क्षेत्र में एक और पर्यटन क्षेत्र अतरंजी खेड़ा भी शुमार है। यहां पर भगवान बौद्ध का मठ है। यहां बड़ी संख्या में बौद्ध पर्यटक आते हैं। साथ ही किला भी पुरातत्व इतिहास को दर्शाता है।
पहले भी हुई थी पहल
सपा सरकार में भी मारहरा को तहसील बनाने के लिए पहल की गई थी, लेकिन मानक पूरे नहीं होने से मारहरा को तहसील का दर्जा नहीं मिल सका था। एक बार फिर मारहरा की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। बताया जाता है कि कासगंज जिला बनने के बाद मारहरा के कई गांव कासगंज में चले गए।
मटर की खेती के लिए मशहूर है मारहरा
जिले का मारहरा क्षेत्र मटर की खेती के मशहूर है। यहां से कई प्रांतों में मटर का निर्यात होता है। साथ ही आम, अमरूद, सेब की भी अच्छी पैदावार है। यहां से फल बड़ी संख्या में निर्यात होते हैं।
इनका कहना है
यह मारहरा की बदनसीबी है क िहर बार मानकों का अभाव विकास में बाधा बन जाता है। तहसील बनने से क्षेत्र विकास की राह पर आगे बढ़ेगा।
वहीद महमूद जुबैरी, पालिकाध्यक्ष मारहरा
मारहरा क्षेत्र को तहसील बनने के बाद पहचान मिलेगी। लेकिन एक बार फिर से क्षेत्र के विकास में मानक रोड़ा बन गए हैं। जबकि क्षेत्र का विकास जरूरी है।
सैयद नजीब हैदर नूरी, सज्जादानशीं, दरगाह खानकाह-ए-बरकातिया
प्रकरण संज्ञान में नहीं है। क्षेत्र में गांव मानक से अधिक हैं। पड़ोसी जिला कासगंज में सहावर को 150 गांव पर तहसील बना दिया गया है। मामले की जानकारी करेंगे। इसके बाद क्षेत्र को तहसील का दर्जा दिलाने की पहल की जाएगी।
वीरेंद्र लोधी, विधायक मारहरा