लोहिया गांव काजीखेड़ा में सड़क ही नहीं
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लोहिया गांवों का हाल बदहाल हो चुका है। गांव में सड़क और न ही तालाब बने हैं। शौचालय भी टूटे पड़े हैं। ग्रामीण कई बार प्रशासन से गांव के विकास की मांग कर चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी पर गांव की ओर ध्यान देने की फुरसत नहीं है।
निधौलीकलां विकास खंड के गांव काजीखेड़ा का नाम जब वर्ष 2015-16 में राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में हुआ था, तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब दिन बहुरेंगे, लेकिन ऐसा कुछ न हुआ। अब आलम यह है कि गांव में सड़क बन सकी है और न ही तालाब बन सका है। तालाब निर्माण के गांव में जमीन चिन्हित तो कर ली गई है, लेकिन विभाग ने अब तक तालाब खोदाई का काम शुरू ही नहीं कराया। इसके साथ ही गांव की मुख्य सड़क भी अधूरी पड़ी हुई है। जहां कीचड़ और गंदगी से ग्रामीणों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि गांव जब से लोहिया योजना में आया है, तब बस दो गलियों का ही निर्माण हो सका है। वहीं गांव में बिजली आपूर्ति का आलम भी बिगड़ा हुआ है। हालात यह हैं कि पहले तो गांव में बिजली आती नहीं है। जगह-जगह तार और खंभे टूटे पड़े हैं। विभाग को जानकारी देने के बाद भी कोई कर्मचारी तारों को सही करने नहीं आया। इसके साथ ही ग्रामीणों को गलत विद्युत बिल बनाकर भेज दिए गए हैं। ग्रामीण रूपकिशोर बताते हैं कि कई गांव बिजली दफ्तर में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों ने बताया समस्याओं के विरोध में वो कई बार कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर चुके हैं। ग्रामीण बाबा पागलदास कहते हैं कि लोहिया गांव में आने के बाद गांव का विकास नहीं हो सका है। अधिकारी निरीक्षण के लिए आते ही नहीं हैं। साथ ही गांव में स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल हैं। सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया कहते हैं गांव काजीखेड़ा की समस्याएं संज्ञान में नहीं है।
नहीं आती हैं मैडम
गांव में बने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय का हाल भी बेहाल है। प्राथमिक विद्यालय में तैनात अध्यापिका रोज विद्यालय नहीं आती हैं। जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी ऐसा ही हाल है। बीएसए और अन्य अधिकारी भी निरीक्षण को विद्यालय नहीं पहुंचते हैं।