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आंखों के सामने छिन गई जीवन भर की कमाई, छलके आंसू

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मार्केट ध्वस्तीकरण के दौरान निकाले गए सामान को ट्रक में भरते दुकानदार। - फोटो : ETAH
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एटा। एक ओर दुकानों पर जेसीबी की चोटें पड़ रही थीं तो दूसरी ओर दुकानदारों की आंखों के सामने उनकी जीवन भर कमाई छिन गई, इससे उनके आंसू छलक रहे थे। किसी ने बैंक से कर्जा लेकर तो किसी ने जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर व्यापार किया था, जो कुछ घंटों में उजड़ गया। उन्हें इससे कुछ मतलब नहीं था कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत हुई या राजनीतिक प्रतिद्वंदता से। उनका दर्द और चिंता यही थी कि अब क्या होगा?
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मार्केट में कुल 25 दुकानें बनी हुई थीं। जिसमें से 10 जून को दो दुकानें तोड़ी जा चुकी थीं। 23 दुकानें मंगलवार को तोड़ी गईं। दुकानदारों का कहना था 50 हजार रुपये पगड़ी के देकर दुकान किराए पर ली थी। व्यापार शुरू करने में चार-पांच लाख रुपये लगा दिए। यह कमाई आंखों के सामने छिनी जा रही है। हम सड़क पर आ गए हैं। ऐसे में बैंक से लिया कर्ज कैसे भर पाएंगे, तो किसी ने बेटी की शादी का हवाला दिया। दुकानों से निकालकर सड़क पर रखे सामान को देख यह भी चिंता थी कि इसे कहां ले जाएं, जो सामान मलबे में दब गया, उसका दर्द आंखों से आंसू बनकर छलक रहा था।
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