एटा। छात्रा पर एसिड अटैक के मामले में विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट सारिका गोयल ने आरोपी को दोषी ठहराया। उसे आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया है।
इस घटना को करीब 8 साल पहले शहर में जीटी रोड पर अंजाम दिया गया था। मामले की रिपोर्ट पीड़िता की मां ने कोतवाली नगर में दर्ज कराई। बताया कि मोहल्ला शिवओमपुरी निवासी उनकी 17 वर्षीय पुत्री को कई दिन से परेशान कर रहा था। अश्लील इशारे व बातें करता था। पुत्री ने यह सब बताया तो मैं उसके साथ आने-जाने लगी। 23 अप्रैल 2016 को सुबह के समय उसको ट्यूशन के लिए ले जा रही थी। तभी जीटी रोड स्थित खेमका पेट्रोल पंप के पास अजय आया और पुत्री के चेहरे व शरीर पर एसिड फेंक दिया और भाग गया। अदालत में अजय को दोषी ठहराए जाने के बाद उसके अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वह मजदूरी करता है, यह उसका पहला अपराध है। उसकी उम्र 26 वर्ष है। घर में अन्य कोई कमाने वाला नहीं है, कम से कम दंड दिया जाए। लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीर प्रकृति के आगे इन दलीलों को बिल्कुल नहीं माना।
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कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एसिड अटैक पूरे समाज पर अभिशाप
अपने निर्णय में न्यायाधीश ने एसिड अटैक को लेकर गंभीर और मार्मिक टिप्पणी भी की। कहा कि किसी भी मारपीट या हमले में व्यक्ति को चोटें आती हैं और समय के साथ ठीक हो जाती हैं। लेकिन एसिड अटैक ऐसा हमला है जिसमें पीड़िता उस समय के बाद हमेशा रोती है। अपने चेहरे के साथ-साथ उसे लोगों से घृणा होने लगती है। उसका पुनर्वास तथा आजीविका के साधन, लोगों का साथ, विवाह आदि सभी सामाजिक व्यवस्थाएं उसके लिए सीमित हो जाती हैं। वह अपना खुद का चेहरा देखने से डरने लग जाती है। एसिड अटैक किसी पीड़िता के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज पर अभिशाप है। इस मामले में पीड़िता मात्र 17 साल की छात्रा थी। जो अपने सपनों के साथ ट्यूशन जा रही थी। लेकिन इस घटना ने उसकी पूरी जिंदगी को पलट दिया और आज तक वह उस भयाभह सुबह से बाहर नहीं निकल पा रही है। उसका पूरा भविष्य अंधकारमय हो गया। ऐसे अभियुक्तों के साथ नरमी नहीं जानी चाहिए।