एटा। थाना अवागढ़ क्षेत्र के गांव चमरपुरा मजरा मीसा कलां निवासी भानुप्रताप ने थाना अवागढ़ में तहरीर दी थी कि 29 मार्च 2013 को उनके भाई राजवीर और उसकी पत्नी सुमन का गांव के ही राजकपूर की पत्नी रेखा उर्फ रूमा से मवेशी बांधने को लेकर विवाद हो गया। विवाद के बाद शाम करीब सात बजे भाई राजवीर शौच करने के लिए घर से निकला तभी गांव के रामपाल के दरवाजे के सामने से गुजरते समय रूमा ने सरिया तथा उसके पति राजकपूर पुत्र सन्नू लाल ने तमंचा और नवाब सिंह व नाहर सिंह ने लाठी व फरसा से राजवीर पर हमला कर दिया। रूमा ने अपने पति राजकपूर से कहा कि देखता क्या है मार दे गोली, इस पर राजकपूर ने राजवीर के सिर में गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर भानुप्रताप और गांव के रामपाल व बैनीराम आदि मौके पर पहुंचे तब तक आरोपी भाग गए। इन सभी का पीछा भी किया, पर पकड़ में नहीं आए। परिजन राजवीर को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मामला सुनवाई के लिए न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी प्रथम) रीतेश सचदेवा की अदालत में पहुंचा। अदालत ने तमाम गवाहों के बयान, विवेचक की विवेचना और तथ्यों के आधार पर रेखा उर्फ रूमा पत्नी राजकपूर, राजकपूर, नबाब सिंह और नाहर सिंह को राजवीर की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं 35-35 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है। वहीं राजकपूर को आयुघ अधिनियम का दोषी पाते हुए पांच वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। शासन की ओर से मामले में पैरवी एडीजीसी योगेंद्र कुमार व प्रदीप गुप्ता द्वारा की गई। वहीं एक अन्य मामले में आरोपी अवधेश कुमार निवासी नगला पोपी, थाना एका, जिला फिरोजाबाद को लूट के एक मुकदमा में दोषी पाते हुए न्यायालय स्पेशल जज डकैती द्वारा 06 वर्ष के कारावास एवं 1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।