एटा। मेडीकल कॉलेज में अप्रैल माह से चिट्ठी पर चिट्ठी लिखकर अधिकारियों को भेजी जाती रहीं, लेकिन दवाएं अब तक नहीं आ सकी हैं। मरीज लगातार भटक रहे हैं और जिम्मेदार बेफिक्र होकर बैठे हैं। अब ओपीडी में मात्र चिकित्सकों के परामर्श तक ही इलाज सीमित होकर रह गया है। मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
वीरांगना अबंतीवाई लोधी स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज दो माह से दवाओं की कमी से जूझ रहा है। मरीज सुबह से ही ओपीडी में चिकित्सकों से पर्चे पर दवाएं लिखवा लेते हैं, लेकिन औषधि वितरण कक्ष पर एक-दो तरह की दवाएं ही मिल रही हैं। दवाओं की आपूर्ति कराने में अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं और मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि हमारी ओर से चिट्ठी पर चिट्ठी लिखी जा रहीं हैं। दवाओं के खरीदने की बात भी कही जाती है लेकिन अब दवाएं नहीं आ सकी हैं।
बोले मरीज, बाहर से खरीद रहे दवा
मेडिकल कॉलेज में सुबह आ गए और लाइन में लगकर दवाएं लिखवा लीं। जब दवा वितरण केंद्र पर पहुंचे तो एक तरह की गोली दे दी गईं। बाकी बाहर से लाए हैं। -दिनेश कुमार, कैलाशगंज
बुखार और सर्दी हो गई है, इसकी दवा लेने आई हूं। डॉक्टर ने तो दवाएं लिख दी हैं लेकिन अस्पताल में दवाएं नहीं मिली हैं। बाहर से लेने के लिए कहा गया है। - सोनी देवी, मोहल्ला रेवाड़ी
अस्पताल में दवाएं नहीं मिली हैं, अब बाजार से दवाएं लेनी पड़ रही हैं। 15 दिन पहले भी दवा नहीं मिली थीं तब भी बाहर से खरीदनी पड़ी थीं, कोई नहीं सुनता। -हरी शंकर, शिवसिंहपुर
मेडिकल कॉलेज नाम का ही है। यहां पर मरीजों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। डॉक्टर दवाएं लिख देते हैं लेकिन मिलती नहीं है और बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। - धर्मेंद्र कुमार, अरथरा