अखिल भारतीय विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के तीसरे दिन भक्तों ने हवनकुंड में आहूतियां दी। देर शाम तक प्रवचन कार्यक्रम चले।
मुख्य अतिथि सीडीओ श्रीनिवास मिश्र ने अध्यात्म पर विचार रखे। उन्होंने महाकवि तुलसीदास की रचना परहित सरिस धर्म नहीं भाई का उदाहरण देते हुए कहा कि मानव कल्याण से बड़ा कोई धर्म नहीं सभी धर्म मानव कल्याण की ही शिक्षा देते हैं। मुख्य वक्ता लालरूप शर्मा ने कहा कि मनुष्य जीवन में जब गुणों को धारण करता है तो वह देव तुल्य हो जाता है और जब वह राक्षस प्रवृत्ति को अपनाता है तो राक्षसी हो जाता है। मनुष्य योनि प्राप्त करने को देवता भी तरसते हैं, इसलिए मानव जीवन का सदुपयोग करें। वक्ता त्रिलोचन ने कहा कि परिवार टूटने का प्रमुख कारण है कि हम अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी भूल रहे हैं। मकार्यक्रम के दौरान गायत्री परिवार प्रमुख रमनकिशोर पल्तानी, संरक्षक डा. सुरेश गुप्ता, राजीव गुप्ता, विनोद माहेश्वरी, सतेंद्र पंडा, शिवकुमार गुप्ता विशेष कुमार मौजूद रहे।