ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना से कटरी का इलाका थर्रा उठा। संघर्ष में मारे गए लोगों के खून से पतित पावनी गंगा का पानी भी लाल हो गया। दो शव गंगा किनारे पड़े थे, उनका बहता खून गंगा में जा रहा था। तीन शव और घायल भी इधर उधर पड़े थे। खादर की जमीन पर कब्जा होता रहा और प्रशासन सोया रहा, पांच लोगों की मौत के बाद प्रशासन की नींद टूटी और अफसर घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। खादर, गांव किसौल और किलौनी के सन्नाटे को पुलिस प्रशासन की गाड़ियों के हूटर और मृतकों के परिवारीजनों की चीत्कार तोड़ रही थी।
कटरी के इलाके के गांव के लोगों के बीच आए दिन मामूली विवाद में फायरिंग की वारदात होती रहती हैं। शनिवार की सुबह इस कदर रक्त रंजित होगी, इसकी कल्पना किसी को नहीं थी। जिस जगह घटना हुई, वह गांव किलौनी और किसौल के पीछे करीब चार किलोमीटर दूर गंगा खादर में है। मौके पर पुलिस को भारी मात्रा में कारतूसों के खोखे, कारतूस की पेटी, 315 बोर के कारतूस की खाली डिब्बियां मिली है। इसके अलावा मृतकों की जेब से भी कारतूस बरामद हुए। बताया जा रहा है कि पहले दोनों पक्षों के बीच हवाई फायरिंग हुई और फिर एक दूसरे पक्ष को निशाना बनाकर गोलियां चलाई गईं। कटरी की घास और टीले की ओट लेकर दोनों पक्षों के लोग फायरिंग कर रहे थे। मानों जंग उनके बीच चल रही थी। सुखवीर और रामकिशोर के शव पास पास पड़े थे। सुखवीर के सिर में गोली लगी और उसके सिर से खून बहता हुआ गंगा के पानी मिलकर उसे लाल कर रहा था। कटरी की घास के बीच शिवराम का शव पड़ा हुआ था। रामरहीस का शव गंगा की धार के दूसरी तरफ पड़ा हुआ था। अमृतपाल उर्फ अमित के पेट में गोली लगी थी और वह लहूलुहान अवस्था में मिला।