ओलावृष्टि और सूख से फसल गंवाने वाले किसानों को बांटने के लिए आई करोड़ों रुपये की राहत राशि भी अफसर दबाए बैठे हैं। मनमानी का आलम यह है कि एटा और जलेसर तहसील के अफसरों के पास वितरण के आंकड़ा तक नहीं है। वहीं सदर तहसील में को वितरण में अनियमिता के चलते खाता पहले ही सीज हो चुका है। इधर, सूबे में सत्ता बदलने पर नई सरकार ने इसकी पड़ताल शुरू कराई, तो गुपचुप तरीके से चेक वितरण और प्रभावित किसानों की सूची बनाने में अफसर, कर्मी जुट गए हैं।
वर्ष 2015 में ओलावृष्टि के बाद सूखा पड़ने से किसानों की सारी फसल बर्बाद हो गई थी। प्रभावित किसानों को राहत राशि बांटने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने सूखा राहत मद में जिले को 17 करोड़ रुपये और ओलावृष्टि मद में 62.44 करोड़ रुपये भेजे थे। पर, अफसर वितरण के बजाय करोड़ों रुपये दबाए बैठे हैं। अलीगंज तहसील में देखें को सूखा राहत के मद में मिले 6 करोड़ में 5.80 लाख रुपये बांट दिए गए हैं। ओलावृष्टि के मद में मिले 1.69 करोड़ में से अधिकतर धनराशि खाते में पड़ी है। आरके बाबू गया प्रसाद ने यह कह कर पल्ला झाड़ लिया कि सिर्फ 24 गांव के किसानों में वितरण होना बाकी है। जलेसर तहसील के आरके बाबू अशोक कुमार ने बताया कि ओलावृष्टि के लिए शासन से 32 करोड़ रुपये आए थे। एक करोड़ रुपये अभी तक खाते में बचे पड़े हैं। सूखा राहत के मद में शासन से पांच करोड़ रुपये मिले, लेकिन कितना वितरण हुआ। इसका आंकड़ा उनके पास नहीं है। वहीं सदर में सूखा राहत के मद में छह करोड़ रुपये और ओलावृष्टि के मद में 28.17 करोड़ रुपये शासन से मिले। रजिस्टार कानून गो रघुवीर सहाय ने बताया कि राहत वितरण में अनियमितता मिलने पर इसका खाता सीज हो चुका है। तहसील रिकार्ड में 74665 किसानों को ओलावृष्टि और 23019 किसानों को सूखा राहत का मुआवजा वितरण किया गया है, लेकिन अनियमितता पर लेखपाल, तहसीलदार पर रिपोर्ट दर्ज होने और खाता सीज होने के कारण आंकड़ा बताना मुश्किल है।