एटा। सरकारी योजनाओं के साथ-साथ अब समाज में कई ऐसे लोग भी सामने आ रहे हैं, जो अपने व्यक्तिगत प्रयासों से बेटियों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने का काम कर रहे हैं। जिले में ताइक्वांडो कोच कंचन सागर ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अब तक तीन हजार से अधिक बालिकाओं को निशुल्क ताइक्वांडो एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
गांव बारथर निवासी कंचन सागर ने पहले स्वयं ताइक्वांडो की कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी की और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने समाज की बेटियों को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। आज वे विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं। ताकि विपरीत परिस्थितियों में भी बालिकाएं निर्भीक होकर अपना बचाव कर सकें।
कंचन बताती हैं कि उनको इस यात्रा की प्रेरणा परिवार से मिली। लगातार अभ्यास, अनुशासन और मेहनत के बल पर उन्होंने ताइक्वांडो में कई उपलब्धियां हासिल कीं। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने महसूस किया कि यदि प्रत्येक बालिका आत्मरक्षा के गुर सीख ले तो वह न केवल स्वयं सुरक्षित रह सकती है, बल्कि समाज में महिला सुरक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी दे सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने निशुल्क प्रशिक्षण अभियान शुरू किया, जो लगातार आगे बढ़ रहा है।
बताया कि उनका उद्देश्य अधिक से अधिक बालिकाओं तक आत्मरक्षा का प्रशिक्षण पहुंचाना है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकें।
उपलब्धियां
वर्ष 2019 : राज्यपाल द्वारा स्काउट-गाइड में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित।
वर्ष 2020: दक्षिण कोरिया से ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट द्वितीय दान की उपाधि प्राप्त।
ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी और कोच के रूप में पहचान बनाई।
राष्ट्रीय खेल संस्थान की ओर से प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं।
अब तक 3,000 से अधिक बालिकाओं को निशुल्क ताइक्वांडो एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया।
विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में बालिकाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक कर नियमित प्रशिक्षण दे रही हैं।
कंचन सागर