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यहां डाकू भी आते थे माता रानी का आशीर्वाद लेने

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सकीट स्थित मंदिर में माता काली की प्रतिमा - फोटो : ETAH
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सकीट। औछा-मैनपुरी मार्ग पर बने प्राचीन माता काली देवी मंदिर में लोगों की अगाध आस्था है। कभी समय था जब डाकू भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने जाने से पहले माता रानी का आशीर्वाद लेने आते थे, तो बाद में चढ़ावा चढ़ाने आते थे। मान्यता है कि माता रानी सभी की मुराद पूरी करती हैं।
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माता काली के दरबार में दस्यु सरगना छविराम, महावीरा, पोथी ने आकर माता की आराधना की थी। मान्यता है कि माता काली के मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से पूजा अर्चना करने आता है, माता रानी उसके सारे दु:ख दर्द पल भर में हर लेती है।
हिंदू धर्म में देवी देवताओं के कई रूप हैं। मातारानी भी नो स्वरूपों में विधमान हैं जो नवरात्र के दिनों में हमारे समक्ष आती हैं । नवरात्र पर उपासना जैसे अवसर को हम लोगों को गवाना नहीं चाहिए।
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सपना।
नवरात्र में व्रत रखने से किसी की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। बल्कि मातारानी में आस्था बढ़ती है। सभी को सच्चे मन से उपासना करनी चाहिए, जिससे घर में सुख-शांति का वास हो सके।
सुमन।
मातारानी को प्रसन्न रखने के लिए जो मंत्र जाप दिए जाते हैं उनका शुद्ध उच्चारण कर उपासना करनी चाहिए। शुद्ध मंत्रों के जाप से भक्तों के संकल्प को मजबूती मिलती है।
अंजना।
नवदुर्गा पर मां ने आसुरी शक्तियों तथा बुराइयों का नाश किया था। मातारानी की पूजा करने से वह भक्तों की पुकार जरूर सुनती हैं, बशर्ते माता रानी में आस्था और श्रद्घा होनी चाहिए।
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जेशमिन तिवारी।
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