एटा। नगर पालिका में सेवा प्रदाता श्रमिक को नियमित कर्मचारी का वेतन दे दिया गया। ईओ ने जब जून और जुलाई माह के बिलों का निरीक्षण किया तो पोल खुल गई। वेतन को अधिष्ठान लिपिक की जगह पर सफाई लिपिक ने बिल को प्रमाणित किए बिना भेज दिया। मामले में ईओ ने लिपिक को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा है।
नगर पालिका में पिछले दिनों ईओ डॉ. दीप वार्ष्णेय ने जून-जुलाई माह के वेतन बिलों का निरीक्षण किया तो पाया कि सेवा प्रदाता श्रमिक के तौर पर कार्यरत रहे राजेंद्र सिंह को नियमित कर्मचारी का वेतन दे दिया गया है। ईओ को राजेंद्र सिंह की नियुक्ति और समायोजन की कोई जानकारी भी नहीं दी गई।
मामले की जांच में पाया गया कि वेतन निकालने का काम अधिष्ठान लिपिक के पास है, लेकिन फाइल पर सफाई लिपिक रामनिवास के हस्ताक्षर से ये भेजा गया है। इसे लेकर ईओ ने सफाई लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ईओ ने जवाब मांगा है कि सफाई लिपिक ने किस अधिकार से हस्ताक्षर किए। साथ ही बिल को प्रमाणित क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने नियम विरुद्ध पत्रावली पर हस्ताक्षर करने, पालिका को आर्थिक क्षति पहुंचाने, अपने अधिकार क्षेत्र से परे कार्य करने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने के कारण दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। ईओ ने 15 दिन में जवाब नहीं मिलने पर एक पक्षीय कार्रवाई के आदेश पारित करने के लिए भी चेताया है।
नगर पालिका में कर्मचारियों की शह पर बड़े-बड़े खेल होते हैं। पालिका की जांच में कई बार कर्मचारियों की मनमानी के मामले सामने आए हैं। एक कर्मचारी तो माली के पद से नियुक्ति पाकर बड़े पद पर बैठा है। जबकि उसे एक बार निलंबित किया जा चुका है।
लगातार किए जा रहे निलंबित
पालिका में कर्मचारियों के निलंबन का सिलसिला चल रहा है। फर्जी प्रमाण पत्रों से नौकरी पाने वाले कर्मचारी को निलंबित किया जा चुका है। जबकि बीते दिनों डीएम ने संपत्ति लिपिक और सफाई निरीक्षक को निलंबित किया है।
एक सेवा प्रदाता श्रमिक को नियमित कर्मचारी का वेतन दिए जाने का मामला सामने आया है। जिसमें सफाई लिपिक को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
डॉ. दीप वार्ष्णेय, अधिशासी अधिकारी।