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ज्यादातर बसों में वाइपर न खिड़कियों में शीशे, दरवाजे भी खस्ताहाल

Sun, 11 Dec 2016 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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अधिकतर बसें खटारा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शीतलहर और कोहरे के कारण बसों और ट्रेनों में यात्रा करना मुश्किल हो रहा है। यह परेशानी तब और बढ़ जाती है जब बस की खिड़कियों में शीशे ही न हों। साथ ही दरवाजे और इसकी सीटें भी खस्ताहाल हो। इससे निपटने के लिए परिवहन निगम लापरवाह बना हुआ है। रोडवेज की कई बसों में फॉग लाइट, रेडियम स्टीकर, वाइपर मेंटेनेंस बहुत ही खराब है। ऐसे में यात्रियों को निगम की खस्ताहाल बसों में सफर के दौरान ठिठुरना पड़ रहा है। वहीं, अफसर बसों में मेंटेनेंस चलने की कह कर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।  
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यूपीएसआरटीसी भले की यात्रियों को हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल कर रहा हो, लेकिन मौसम के मुताबिक यात्रियों को बसें उपलब्ध कराने में परिवहन निगम नाकाम साबित हो रहा है। एटा रोडवेज डिपो में 159 बसों का बेड़ा है। इनमें 14 नई बसें हैं। पिछले पांच दिनों से शीतलहर और घने कोहरे का प्रकोप बढ़ रहा है। डिपो की खस्ताहाल बसों में सफर करने वाले यात्री ठिठुर रहे हैं।
आलम यह है कि किसी बस का शीशा टूटा है तो किसी बस का मेन गेट खस्ताहाल है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक रोडवेज बस चालक ने बताया कि कई बार वर्कशॉप में बस ले जाकर वाइपर सही करने को कहा गया, लेकिन सही नहीं हुआ। ऐसे में सफर के दौरान कोहरा सामने के शीशे पर जमने से सूनसान इलाके में बस रोक कर शीशा साफ करना पड़ रहा है। यही नहीं डिपो की कई बसों में अभीतक बैक लाइट के साथ रेडियम स्टिकर नहीं लगे हैं।  इसके चलते घने कोहरे में पीछे से दूसरा वाहन टकरा सकता है। हाड़ कपाने वाली सर्दी में यात्री ठिठुर रहे हैं।
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कोट
 बसों में मेंटेनेंस कराया जा रहा है। ज्यादा खस्ताहाल बसें रात में सड़क पर नहीं उतारी जा रहीं हैं। उम्मीद है कि इसी सप्ताह सभी बसें मेंटेनेंस के बाद चलने लगेंगी।
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दीपेंद्र सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक  
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