एटा। पं. गोविंद बल्लभ पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम में सीबीएसई क्लस्टर गर्ल्स एथलेटिक्स के खेल चल रहे हैं। इसमें दूसरे दिन हुई दौड़ प्रतियोगिताओं में झांसी के शेरवुड स्कूल की बालिकाओं का दबदबा रहा।
अंडर-19 की 100 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में वैष्णवी कुमारी ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया। 800 मीटर में सिफा खान ने कांस्य पदक तथा 4 गुणा 400 मीटर रिले दौड़ में अदिति ने रजत पदक प्राप्त किया। वहीं अंडर-17 की 100 मीटर दौड़ में श्रेयांशी ने स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। यह सभी शेरवुड स्कूल झांसी की छात्राएं हैं। अंडर-14 की 200 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में डीएवी पब्लिक स्कूल औरैया की अंशी सांगवान ने प्रथम, पुलिस मॉर्डन स्कूल मथुरा की अनामिका पाल ने द्वितीय तथा एसकेडी एकेडमी लखनऊ की सृष्टि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 800 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में श्याम बिहारी पब्लिक स्कूल एटा की राधिका ने पहला व ज्ञानदीप पब्लिक स्कूल फिरोजाबाद की ईशा ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।
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8 साल की जैनब ने दोगुनी उम्र वाली प्रतियोगियों को पछाड़ा
कानपुर के कल्यानपुर में स्थित डीपीएस स्कूल की छात्रा जैनब ने अंडर-19 ग्रुप की 1500 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने अपने से दोगुनी उम्र वाली कई प्रतियोगी खिलाड़ियों को पछाड़ दिया। जैनब अपनी मां निम्मी के साथ आई हैं। उन्होंने बताया कि जैनब के पिता हमेशा उसका सहयोग करते हैं। इसकी वजह से मात्र 8 वर्ष की उम्र में ही जैनब दौड़ लगा रही है और सफलता प्राप्त कर रही है। वहीं जैनब के कोच दिनेश सिंह भदौरिया ने कहा कि कोच से ज्यादा माता-पिता का साथ मिलता है, तब खिलाड़ी अधिक सफलता प्राप्त कर पाता है।
स्टेडियम में फील्ड व शौचालय को लेकर रही शिकायत
जिले के पं. गोविंद बल्लभ पंत स्पोर्ट्स स्टेडियम में सीबीएसई क्लस्टर गर्ल्स एथलेटिक्स के खेल चल रहे हैं। जिसमें प्रदेश से सीबीएसई बोर्ड के 46 स्कूलों की छात्राएं प्रतिभाग कर रहीं हैं। इनमें से कुछ छात्राओं और प्रशिक्षकों का कहना है कि एटा जिले को एक जिला एक खेल योजना के तहत एथलेटिक्स के लिए चुना गया है। इसके बावजूद भी यहां के मैदान में जहां तकनीकी खामियां देखने को मिल रहीं हैं। कई स्थानों पर मैदान हल्का ऊंचा-नीचा है। डिस्कस थ्रो फेंकने वाले स्थान पर पेंट कर दिया गया है, जिसकी वजह से खिलाड़ी सही तरीके से खड़े नहीं हो पा रहे। वहीं शौचालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। साथ ही महिला खिलाड़ियों के लिए चेंजिंग रूम भी नहीं है। जिसकी वजह से उन्हें काफी परेशानी होती है।