जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के नाम पर लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पीड़ित को मात्र एक वैक्सीन ही लगाई जा रही है, उसके पर्चे पर डॉक्टर वैक्सीनेशन की अगली तिथि नहीं लिख रहे हैं।
अस्पताल के फार्मेसी विभाग में तैनात कर्मी भी एक वैक्सीन लगाने के बाद अगली वैक्सीन के लिए न आने की कह देते हैं। इसके पीछे वे तर्क देते हैं कि उनके दोनों हाथों में ही एक बार में ही पूरी डोज दे दी गई है।
जिले में प्रतिदिन सौ से कुत्ता या बंदर के काटने से पीड़ित लोग जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जनवरी में वैक्सीन खत्म हो जाने पर वैक्सीनेशन से वंचित रहने पर कई लोगों में रेबीज के लक्षण सामने आ चुके हैं। इनमें से कई की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है।
सीएमओ के अनुसार जानवर के काट लेने पर पहली वैक्सीन 24 घंटे के अंदर लगवाना आवश्यक होता है। दूसरी वैक्सीन चौथे दिन और तीसरी सातवें दिन लगाई जाती है। यदि जानवर 10 दिन के भीतर मर जाता है या फिर उसमें पागल होने के लक्षण होते हैं तो फिर पांच वैक्सीन लगाई जाती हैं। यह कोर्स तीन माह के अंदर पूरा होता है। आमतौर पर रेबीज तीन दिन से तीन माह की अवधि में ही फैलता है।
कुत्ते के काटने पर वैक्सीन लगवाने अस्पताल आई तो एक वैक्सीन लगा दी गई। पूछा कि अब कब आना है तो कह दिया कि अब आवश्यकता नहीं है।
-गुड्डो देवी, निवासी किलोनी
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कुत्ते के काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल आए। यहां चिकित्सक ने पहली वैक्सीन की तिथि ही पर्चे पर अंकित की।
- हर्ष कुमार, निवासी बहादुरपुर
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कुत्ते के काटने की पहली वैक्सीन ही लगाई गई। अन्य वैक्सीन लगवाने आने के लिए फार्मेसिस्ट ने मना कर दिया।
- सचिन निवासी मुबारिक पुर सिंगतरा
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रेबीज की एक वैक्सीन लगाने के कोई आदेश नहीं दिए गए हैं। एक वैक्सीन लगाई जा रही है तो मामले की जांच की जाएगी। जांच में मामला सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-रंगजी दुबे, सीएमओ