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विदेेशों में भारतीय छात्रों से बरता जा रहा टीका लगाने में भेदभाव

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एटा। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर बेहद खतरनाक है। इससे भारत ही नहीं विदेशों में रह रहे अप्रवासी भारतीय भी चिंतित हैं। विदेशों में रहकर पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को कोरोना की वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है। वहां पहले स्थानीय लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक आदि राज्यों के छात्र-छात्राओं ने भारत सरकार से हस्तक्षेप कर उन्हें भी प्राथमिकता पर वैक्सीन लगवाने की मांग की है। इस संबंध में राज्यसभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने विदेश मंत्री जयशंकर और स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन को ट्वीट के साथ ही पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
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बड़ी संख्या में भारतीय छात्र-छात्राएं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, चीन, लंदन, यू्क्रेन सहित यूरोप के विभिन्न देशों में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पिछले साल मार्च में जब चीन के बुहान शहर से कोविड 19 का संक्रमण फैला था तब केंद्र सरकार की पहल पर बड़ी संख्या में विदेशों में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को भारत लाया गया था।
एटा के भी लोग फंसे थे विदेशों में
शहर के कटरा मोहल्ला निवासी एक छात्रा चीन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी, वहीं जलेसर के प्रोफेसर दंपती भी चीन के बुहान शहर में फंस गए थे। इन्होंने तब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट किया था, तब केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए विमान से दंपती भारत लौट सके थे।
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यूक्रेन में पढ़ रहे हैं दस हजार छात्र
सांसद हरनाथ सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों के करीब दस हजार छात्र-छात्राएं यूक्रेन में पढ़ाई कर रहे हैं। इन्होंने फोन कर हरनाथ सिंह को बताया कि वहां कोरोना की वैक्सीन लगाने में भेदभाव बरता जा रहा है। कहा कि वहां की सरकार वैक्सीन लगाने में भेदभाव बरत रही है, इससे भारतीय छात्राओं में घबराहट है। ऐसे मेें केंद्र सरकार मामले में तत्काल संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करे।
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