मैं तस्वीर बयां नहीं कर सकता, हालात वहां के कैसे थे। आंखों के सामने मौत
नाच रही थी। कच्चे मकान भरभराकर गिरते दिखाई दे रहे थे। लोग जान बचाकर भाग
रहे थे। कुछ ही देर में सड़कों पर मकानों का मलबा और लाशें बिछी दिखाई दीं।
मैं शवों के ऊपर से ही जान बचाकर भागा। एक कैंप में तीन दिन तक भूखे
प्यासे रहे। परिवारीजनों से भी बात नहीं हो पाई। किसी तरह काठमांडू बचाव
कार्य के लिए पहुंचे भारतीय वायुसेना के विमान से 190 लोग सकुशल सोमवार की
रात 12 बजे दिल्ली पहुंचे। परिवारीजनों ने सकुशल पाकर राहत की सांस ली। यह
आंखों देखी घटना नेपाल में आए भूकंप में फंसे 50 वर्षीय आदेश कुमार
वार्ष्णेय ने बताई। टेलीफोन पर बात करते समय बार-बार उनकी जुबान लड़खड़ा
रही थी और उस दिन के मंजर को देखकर आज भी उनकी रूह कांप जाती है।
एटा के कस्बा सकीट निवासी व्यापारी स्वर्गीय प्रेमचंद्र वार्ष्णेय के
सबसे छोटे पुत्र आदेश कुमार वार्ष्णेय इंजीनियर हैं। दिल्ली के रोहणी में
परिवार के साथ रह रहे हैं। फरवरी 2014 में उनकी नौकरी काठमांडू में सीवर
प्लांट बनाने वाली एक कंपनी में लग गई। यहां से नौकरी छोड़कर वह काठमांडू
चले गए। परिवार दिल्ली में ही रह रहा है। जिस दिन नेपाल में भूकंप आया, उस
दिन आदेश कुमार साइड पर अपनी टीम के साथ मौजूद थे और काम करा रहे थे।
उन्होंने बताया कि बीते शनिवार सुबह 11 बजे अचानक जमीन हिलने लगी। ऐसा लग
रहा था जैसे झूला झूल रहे हैं। पहला भूकंप का झटका जो लगा वह दो मिनट का
था, उसके बाद एक घंटे तक हर पांच सात मिनट तक झटके लगते रहे। कच्चे मकान
दिवाली पर जैसे पटाखों की आवाज आती है उस तरह से गिर रहे थे।
लोग जान बचाकर
भाग रहे थे। किसी तरह खुले मैदान में पहुंचे, जहां हम रह रहे थे वहां की
बिल्डिंग भी चटक गई। इसलिए घर नहीं जा सके। अन्य मजदूरों के साथ वहां पड़े
शवों के ऊपर से ही एक कैंप में पहुंचे, लेकिन वहां खानेपीने की कोई
व्यवस्था नहीं थी। शनिवार पूरा दिन व रविवार शाम तक खाने को कुछ नहीं मिला।
बाद
में किसी तरह अपने घर पहुंचे, जहां ब्रेड-नमकीन ले आए, लेकिन भूख शांत
नहीं हुई। सोमवार का दिन भी खाली पेट ही काटा। दोपहर बाद जब भारतीय
वायुसेना का विमान पहुंचा, तब कुछ खाने को मिला और उससे रात में दिल्ली
पहुंचे। उन्होंने बताया कि इस दौरान वहां लाइट, सिग्नल न मिलने के चलते
परिवारीजनों से बात भी नहीं हो पाई। उनकी तबियत भी बिगड़ गई। जब दिल्ली
पहुंचकर परिवारीजनों से मिले तो राहत की सांस ली।