एटा। काली नदी से बालू के अवैध खनन के मामले में प्रशासन ठोस कार्रवाई करने से बचता दिखाई दे रहा है। अमर उजाला के अभियान के बाद खनन विभाग की ओर से जैथरा थाने में रिपोर्ट तो दर्ज कराई गई, लेकिन अज्ञात का हवाला दे दिया गया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद आठ दिन बीत गए हैं, लेकिन एक भी माफिया का नाम अब तक पुलिस पता नहीं कर सकी है।
अमर उजाला में काली नदी से अवैध खनन की खबर प्रकाशित होते ही 29 अप्रैल को खनन और राजस्व विभाग की टीम दौड़ पड़ी थी। नदी किनारों की स्थिति को देखा और पैमाइश की। साथ ही आसपास के गांव के लोगों से बातचीत की। इसमें स्पष्ट हो गया कि यहां से बालू का खनन रोजाना ही किया जा रहा है। इस पर खनन निरीक्षक सुरेश कुमार ने जैथरा थाने में अज्ञात लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करा दी।
जिम्मेदारी थी कि थाना पुलिस जांच-पड़ताल कर खनना से जुड़े माफिया के नाम का पता लगाती। लेकिन इसमें अभी तक पुलिस की दिलचस्पी नजर नहीं आई है। थाना प्रभारी जैथरा डॉ. सुधीर राघव का कहना है कि खनन निरीक्षक द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में विवेचना की जा रही है। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि खनन माफिया को चिह्नित कर पकड़ा जाए।
जैथरा थाने में कम से कम एफआईआर तो दर्ज की गई, लेकिन अन्य तीन थानों की पुलिस तो अभी भी बेअसर बनी हुई है। किसी भी थाना पुलिस ने माफिया पर कार्रवाई तो दूर, रिपोर्ट दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई है।