अलीगंज में गुरुवार को हुए बस हादसे के बाद हर कोई मायूस हुआ। लेकिन ऐसे हादसों के कारणों के बारे में किसी ने नहीं सोचा। जिले में हादसों का बढ़ता ग्राफ साफ तौर पर जाहिर करता है कि कमियां हर ओर से हो रही हैं। खराब सड़कों के साथ यातायात नियमों का पालन नहीं करना भी हादसों को बढ़ा रहा है। जिले में यातायात नियमों को लेकर कोई जागरूक नजर नहीं आता। पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो लोग भी नियमों की धज्जियां उड़ाने से गुरेज नहीं करते।
आलम यह है कि लोग हेलमेट लगाने में भी शर्म महसूस करते हैं। स्कूल बसों की बात करें तो स्कूल बस चालक भी नियमों को लेकर जागरूक नहीं हैं। बच्चों को स्कूल लाने और छोड़ने के दौरान तेज रफ्तार से वाहनों को दौड़ाया जाता है। अलीगंज में हुए बस हादसे की बड़ी वजह भी यही थी, लेकिन जिले में इस पर लगाम नहीं लगती नजर नहीं आती।
यातायात नियमों का आलम है कि जमकर ट्रिपल राइडिंग होती है और पुलिस मूक दर्शक बनी देखती रहती है। पुलिस भी नवंबर माह में यातायात जागरूकता कार्यक्रम चलाकर कोरम पूरा कर लेती है, लेकिन इसके बाद सालभर नियमों की धज्जियां उड़ती रहती हैं। यातायात प्रभारी ब्रह्म प्रकाश यादव कहते हैं कि लोगों को नियमों के पालन के प्रति जागरूक करते रहते हैं। लोगों को खुद भी पुलिस का सहयोग करने की जरूरत है।
ट्रैफिक सिग्नल का प्रस्ताव लटका
जिले में यातायात नियमों के पालन और व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन ने वर्ष 2008 में जीटी रोड पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन वह प्रस्ताव अटक गया। इसके बाद अधिकारियों ने इसे लेकर पहल नहीं की।
कोरम पूरा करने तक सिमटी कार्यशाला
संभागीय परिवहन विभाग का दावा है कि समय-समय पर स्कूल संचालकों को बैठक और कार्यशाला करके निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन यह दावा भी बस कोरम पूरा करने तक सिमटा है। परिवहन विभाग ने अब तक कभी भी स्कूल बस ड्राइवरों की कोई कार्यशाला आयोजित नहीं की है।