नाममात्र के लागत मूल्य पर मध्यान्ह भोजन का मैन्यू मखौल बन रहा है। परेशानी बुधवार के दूध के मैन्यू में हो रही है। गर्मी में बढ़ी दूध की किल्लत से जहां बजट गड़बड़ा रहा है। वहीं गुणवत्ता की खानापूरी हो रही है।
शासन की महती मध्यान्ह भोजन योजना में गुणवत्ता से अधिक ध्यान बजट पर दिया जा रहा है। योजना प्रभारी निर्धारित राशि से ही मैन्यू मैनेज करने की खानापूरी कर रहे हैं। इनके अनुसार निर्धारित कनवर्जन कॉस्ट (लागत मूल्य) में मात्रा एवं गुणवत्ता संभव नहीं है। एक प्रभारी ने बताया कि साठ रुपये लीटर के भाव में इस लागत मूल्य पर मात्र सौ एमएल दूध मिलेगा। जबकि उच्च प्राथमिक बच्चों को 5.78 रुपये में 200 एमएल दूध एवं 150 ग्राम खाद्यान्न कैसे संभव है। जबकि प्राथमिक बच्चों को 3.86 रुपये में डेढ़ सौ एमएल दूध एवं 100 ग्राम खाद्यान्न प्रति छात्र देने के निर्देश हैं।
चूल्हे पर पक रहा मिड डे मील
जिले के 60 प्रतिशत परिषदीय स्कूलों में आज भी एमडीएम उपले और लकड़ी से जलाए जाने वाले चूल्हे पर पकाया जा रहा है। आलम यह है कि एक ओर बच्चे क्लास में पढ़ रहे होते हैं, तो दूसरी ओर चूल्हे का धुआं क्लास रूम में घुस कर बच्चों को आंसू बहाने पर मजबूर कर रहा है।
मध्यान्ह भोजन 2016
कुल लाभार्थी संस्थाएं-2030
माध्यमिक विद्यालय-61
सहायता प्राप्त उच्च प्राथमिक-42
परिषदीय उच्च प्राथमिक-561
परिषदीय प्राथमिक विद्यालय-1364
कुल लाभार्थी छात्र-छात्राएं-170536 लगभग
रसोइया मानदेय-1000 रुपए मासिक
यूपीएस कनवर्जन कॉस्ट-5.78 रुपये प्रति छात्र, खाद्यान्न 150 ग्राम
पीएस कनवर्जन कॉस्ट-3.86 रुपये प्रति छात्र, खाद्यान्न 100 ग्राम
बुधवार को दूध
प्राथमिक दूध-150 मिलीग्राम एवं 100 ग्राम खाद्यान्न
उच्च प्राथमिक -200 मिलीग्राम एवं 150 ग्राम खाद्यान्न