संवाद न्यूज एजेंसी
राजा का रामपुर/मारहरा। 36 घंटे की बारिश थमने के बाद भी जिले में तबाही का सिलसिला थम नहीं रहा। राजा का रामपुर और मारहरा क्षेत्र में भरभराकर गिरे मकानों ने गरीब परिवारों की मेहनत की पूंजी और सिर से छत छीन ली है। मलबे में इन परिवारों की उम्मीदें भी दब गई हैं।
हादसों के दाैरान कोई जनहानि नहीं हुई लेकिन उजड़े आशियानों ने इन बेसहारा परिवारों के सामने जीवन यापन का संकट खड़ा कर दिया है।
जिले की सीमा पर बसे राजा का रामपुर के मोहल्ला मलियान में सोमवार शाम दिनेश कठेरिया के मकान की दीवार भरभराकर गिर गई। हादसे के समय दिनेश दीवार किनारे बंधी भैंस को खोलकर दूसरे स्थान पर बांधने के लिए ले जा रहे थे। दिनेश के भैंस लेकर हटते ही दीवार ढह गई।
दीवार गिरने की तेज आवाज सुनकर एकत्रित हुए लोगों ने सभी के सकुशल रहने पर ईश्वर का शुक्रिया अदा किया और दिनेश को ढाढ़स बंधाया।
दूसरा हादसा मारहरा क्षेत्र के गांव खकरई में मध्यरात्रि को हुआ। लालाराम दिवाकर ने बताया कि उनके पशु खुले में बंधे थे इसलिए वह उनकी रखवाली के लिए पत्नी नेमवती के साथ मकान के खुले हिस्से में सो रहे थे। मध्यरात्रि के समय अचानक उनके कमरे की छत भरभराकर ढह गई।
रात के सन्नाटे में छत गिरने की धमाकेदार आवाज सुनकर गांव के लोग नींद से जाग गए। बाहर आकर देखा तो लालाराम का आशियाना उजड़ चुका था। सुबह लोगों ने मलबे में दबे सामान को बाहर निकलवाया। लालाराम बकरी पालन कर गुजारा करते हैं। घर उजड़ने से लालाराम और उनकी पत्नी बेहाल हैं, उनके सामने अब सिर छिपाने का संकट पैदा हो गया है।